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पटाखा फैक्ट्री हादसे में झुलसे मासूम तैमूर ने तोड़ा दम

Ratna Netam
19 Jun 2026 9:43 PM IST
पटाखा फैक्ट्री हादसे में झुलसे मासूम तैमूर ने तोड़ा दम
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परिजन सदमे में
मुजफ्फरनगर/बिजनौर। बिजनौर जनपद के मेघपुर गांव में संचालित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण हादसे में गंभीर रूप से झुलसे साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे ने आखिरकार जिंदगी की जंग हार दी। उत्तराखंड के एम्स ऋषिकेश में सात दिनों तक चले इलाज के बाद मासूम तैमूर ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की खबर से गांव और परिवार में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
जानकारी के अनुसार, भोपा थाना क्षेत्र के रुड़कली तालाब अली गांव निवासी
मोहम्मद फुरकान
की पत्नी यासमीन अपने तीन बच्चों—सात वर्षीय अर्श, पांच वर्षीय इनाया और सबसे छोटे साढ़े तीन वर्षीय तैमूर—के साथ कुछ दिन पहले अपने मायके मेघपुर गांव गई हुई थीं। 12 जून को मेघपुर में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में भीषण आग लग गई। हादसे के समय मासूम तैमूर फैक्ट्री के पास ही खेल रहा था। आग की तेज लपटों ने उसे अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद आनन-फानन में बच्चे को इलाज के लिए काशीपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक देखते हुए उसे वेंटिलेटर पर रखा गया।
परिजनों के मुताबिक, हालत गंभीर होने के बावजूद समय पर सही जानकारी नहीं मिल पाई, जिससे इलाज में देरी हुई। इस मामले में बच्चे के पिता मोहम्मद फुरकान ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें हादसे की सूचना दो दिन बाद दी गई। यदि समय पर जानकारी मिल जाती तो बच्चे को बेहतर इलाज मिल सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवैध पटाखा फैक्ट्री के पास छोटे बच्चों का होना बड़ी लापरवाही थी और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 14 जून को सूचना मिलने के बाद पिता तुरंत मेघपुर पहुंचे और बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कराया गया। एम्स में डॉक्टरों की टीम ने तैमूर को बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन उसके शरीर के अंदरूनी अंग बुरी तरह झुलस चुके थे। लगातार प्रयासों के बावजूद गुरुवार को मासूम ने दम तोड़ दिया।
शुक्रवार शाम जब तैमूर का शव पैतृक गांव रुड़कली तालाब अली लाया गया तो माहौल गमगीन हो गया। बच्चे को देखकर मां यासमीन बार-बार बेसुध होती रहीं, जबकि दादी मेहरुन्निसा का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे गांव में मातम पसर गया और लोगों ने घरों में चूल्हे तक नहीं जलाए। ग्रामीणों की भारी भीड़ मासूम की अंतिम यात्रा में शामिल हुई। शुक्रवार की शाम नम आंखों के बीच बच्चे को सुपुर्दे खाक किया गया। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध पटाखा फैक्ट्रियों की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
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