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एनेस्थीसिया के बाद मासूम की मौत, जांच में जुटी पुलिस

Saba Naaz
11 July 2026 2:29 PM IST
एनेस्थीसिया के बाद मासूम की मौत, जांच में जुटी पुलिस
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तिरुवनंतपुरम। केरल के कन्नूर जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां इलाज के दौरान एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद 18 महीने के मासूम बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार की शिकायत पर पुलिस ने एक डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, कन्नूर जिले के एरामम-कुट्टूर निवासी टी. सूरज और विजीशा के इकलौते बेटे देवांश शौर्य को 5 जुलाई को घर के बाहर खेलते समय गिरने से होंठ पर गंभीर चोट लग गई थी। गिरने के कारण उसके होंठ पर कट लग गया था, जिसके बाद परिवार उसे इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा।

परिजनों ने बताया कि शुरुआत में बच्चे को माथामंगलम के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उसे आगे के इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां होंठ पर टांके लगाने की प्रक्रिया की जानी थी।

टांके लगाने से पहले बच्चे को एनेस्थीसिया यानी बेहोशी की दवा दी गई। आरोप है कि दवा दिए जाने के बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया।

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चे की सामान्य चोट के इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था, लेकिन एनेस्थीसिया देने के बाद उसकी जान चली गई। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग भी घटना को गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों को इलाज के दौरान विशेष सावधानी की जरूरत होती है और किसी भी प्रक्रिया से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए।

देवांश शौर्य अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, इसलिए उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजन लगातार मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना में किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।

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