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नेहा बोरा पर फेंकी गई स्याही

Shantanu Roy
7 Aug 2026 7:24 PM IST
नेहा बोरा पर फेंकी गई स्याही
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Ranchi. रांची। झारखंड में आज एक बड़ी घटना सामने आई है जिसमें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई, जिससे मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि स्याही किसने फेंकी और इसके पीछे क्या कारण था। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में ये बताया जा रहा है कि आंदोलन और प्रदर्शन के नाम पर देश विरोधी नारें नहीं लगेंगे। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को आज मंच से उतारा गया है। छात्रों ने आज़ादी नारे का विरोध किया है।
छात्रों ने AISA की नेहा बोरा को मंच पर चढ़ने ही नहीं दिया। मंच से नीचे उतार दिया। छात्रों का कहना है कि उन्हें यहां आजादी, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, मेरा लिंग मेरी मर्जी जैसे वाहियात नारेबाजी नहीं चाहिएं। वैसे ये वही AISA की संस्था है जिसने बाटला हाउस में हुए आतंकियों हमलों में, आतंकियों के पक्ष में, उनके न्याय के लिए खड़ी हुई थी।




पिछले करीब दो सप्ताह से रांची में छात्र और अभ्यर्थी JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, पेपर लीक और अन्य कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के 14वें दिन भी कई छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर बैठे रहे। इसी बीच छात्रों के समर्थन में रांची पहुंचीं AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात की और उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इसके बाद AISA कार्यकर्ताओं और छात्रों ने झारखंड विधानसभा तक मार्च निकाला। मार्च के दौरान अचानक नेहा बोरा पर स्याही फेंकी गई। घटना के बाद कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई, हालांकि पुलिस और आयोजकों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया।


मार्च से पहले मीडिया से बातचीत में नेहा बोरा ने कहा कि झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में सरकारी संस्थाओं द्वारा आयोजित होने वाली प्रत्येक परीक्षा पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संपन्न होनी चाहिए। उनका कहना था कि जब भी किसी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होता है या परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल निजी एजेंसियों पर डालकर सरकार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती। नेहा बोरा ने कहा कि जिन निजी एजेंसियों पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, उन्हें पूरी तरह सिस्टम से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय हो और संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि AISA आगामी 10 अगस्त को छात्रों द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम का समर्थन करेगी और अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा के लिए उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।


छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का अभाव रहा है। उनका कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों ने हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस आंदोलन का असर झारखंड विधानसभा तक भी पहुंचा। शुक्रवार को विधानसभा के भीतर भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ, जिसके कारण प्रश्नकाल प्रभावित हुआ। विपक्ष ने सरकार से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर स्पष्ट जवाब देने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।


दूसरी ओर, अभ्यर्थी न्याय मंच ने छात्रों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। मंच के अनुसार इस प्रतिनिधिमंडल में रामावतार महतो, दीनबंधु मंडल, चंदन कुमार, रविशंकर, प्रेम कुमार, अमित कुमार और विमल कुमार शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों पर चर्चा करेगा और समाधान निकालने का प्रयास करेगा। आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत भी चिंता का विषय बनती जा रही है। शुक्रवार को एक छात्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा है। अन्य छात्रों के स्वास्थ्य पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।



राजधानी रांची में चल रहे इस आंदोलन ने अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से भी छात्रों की मांगों को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री और अभ्यर्थी न्याय मंच के प्रतिनिधिमंडल के बीच प्रस्तावित बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोपों की जांच और आंदोलन से जुड़ी मांगों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। वहीं, नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना को लेकर भी आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि घटना के पीछे कौन लोग थे और इसके संबंध में क्या कार्रवाई की जाएगी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से भी आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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