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डिपोर्टेशन मामलों में बढ़ोतरी
Delhi दिल्ली: विदेश मंत्रालय (MEA) ने राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच सऊदी अरब ने दुनिया में सबसे अधिक भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया है। रियाद स्थित भारतीय मिशन के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 8,887, 2022 में 10,277, 2023 में 11,486, 2024 में 9,206 और 2025 (अब तक) में 7,019 भारतीय नागरिकों को सऊदी अरब से डिपोर्ट किया गया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में अधिकांश निर्वासन मामले अवैध सीमा पार करने से नहीं, बल्कि वीज़ा उल्लंघन, इकामा नियमों, श्रम कानूनों के उल्लंघन और सऊदीकरण (Saudisation) नीतियों के तहत किए गए सख्त प्रवर्तन अभियानों से जुड़े हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “खाड़ी क्षेत्र में निर्वासन के अधिकांश मामले वीज़ा अवधि से अधिक ठहरने, बिना अनुमति काम करने या स्थानीय श्रम कानूनों के उल्लंघन से होते हैं।”
इसके विपरीत, अमेरिका से भारतीय नागरिकों के निर्वासन के आंकड़े अपेक्षाकृत कम रहे हैं। MEA के अनुसार, वॉशिंगटन डीसी से 2021 में 805, 2022 में 862, 2023 में 617, 2024 में 1,368 और 2025 में 3,414 लोगों को निर्वासित किया गया। अन्य अमेरिकी मिशनों (सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क, अटलांटा, ह्यूस्टन, शिकागो) से निर्वासन की संख्या मुख्य रूप से दो अंकों या कुछ सौ तक सीमित रही। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका में निर्वासन मुख्य रूप से वीजा ओवरस्टे और स्टेटस उल्लंघन से जुड़े हैं, न कि अवैध प्रवेश या हिरासत से। विदेश मंत्रालय ने निर्वासन के प्रमुख कारणों के रूप में वीजा अवधि से अधिक ठहरना, वैध वर्क परमिट के बिना काम करना, नियोक्ता से भागना (Absconding), स्थानीय श्रम कानूनों का उल्लंघन और समय-समय पर चलाए गए बड़े प्रवर्तन अभियानों को बताया।
सरकार ने कहा है कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारतीय मिशन मेज़बान देशों के अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में रहते हैं ताकि निर्वासन की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन हो और नागरिक सुरक्षित तथा समय पर भारत लौट सकें। अवैध प्रवासन और धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसमें फर्जी नौकरी रैकेट्स के खिलाफ चेतावनी जारी करना, ई-माइग्रेट पोर्टल को मजबूत करना, मिशनों में 24×7 हेल्पलाइन सक्रिय करना और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की स्थापना शामिल है। इसके अलावा अवैध एजेंटों पर खुफिया जानकारी राज्यों के साथ साझा की जाती है।
अक्टूबर 2025 तक ई-माइग्रेट पोर्टल पर 3,505 से अधिक रिक्रूटिंग एजेंट पंजीकृत थे, और शिकायत मिलने पर कई एजेंटों को निष्क्रिय भी किया गया। सरकार का उद्देश्य है कि भारतीय नागरिक विदेशों में सुरक्षित रहें और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इमरजेंसी सर्टिफिकेट के माध्यम से किए गए निर्वासन भारतीय नागरिकों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई का विश्वसनीय संकेत प्रदान करते हैं, क्योंकि कई देश हिरासत (डिटेंशन) के आंकड़े नियमित रूप से साझा नहीं करते। कुल मिलाकर, पिछले पांच वर्षों में सऊदी अरब में भारतीय नागरिकों के निर्वासन के आंकड़े अमेरिका सहित अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक हैं, और इसका मुख्य कारण स्थानीय वीजा, श्रम और रोजगार नियमों के उल्लंघन से संबंधित सख्त प्रवर्तन अभियान हैं।
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