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टैरिफ की अनिश्चितता के बीच भारतीय कारोबारियों को राहत की उम्मीद

Saba Naaz
22 July 2026 10:28 PM IST
टैरिफ की अनिश्चितता के बीच भारतीय कारोबारियों को राहत की उम्मीद
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भारत: अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी के बावजूद भारतीय निर्यातक फिलहाल निराश नहीं हैं, बल्कि उन्हें आने वाले दिनों में राहत मिलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। निर्यातकों का मानना है कि 24 जुलाई के बाद अमेरिका की ओर से लगाया गया 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क हटने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में सस्ते हो जाएंगे। इससे भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ सकती है और निर्यात को फायदा मिल सकता है।

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सभी देशों से आने वाले सामान पर लगाया गया 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इसके बाद अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं पर पिछले साल अप्रैल से पहले लागू शुल्क दरें वापस लागू हो सकती हैं। निर्यातकों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रहती है तो भारतीय कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमतों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

हालांकि, निर्यातकों के बीच शुल्क नीति को लेकर चिंता भी बनी हुई है। उनका कहना है कि अमेरिका की व्यापार नीति में लगातार बदलाव देखने को मिलते हैं और भविष्य में किसी भी नए शुल्क की घोषणा से स्थिति बदल सकती है।

भारतीय वाणिज्य मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। समझौते के दस्तावेज तैयार हैं, लेकिन इस पर हस्ताक्षर की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते में कुछ और समय लग सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल ही में जेनेरिक दवाओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया गया है। उन्होंने घोषणा की है कि वर्ष 2028 से अमेरिका आने वाली जेनेरिक दवाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि, तब तक जेनेरिक दवाओं पर पुराने नियम लागू रहेंगे। भारत के लिए यह राहत की बात है क्योंकि अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है। भारत के कुल जेनेरिक दवा निर्यात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका जाता है।

फिलहाल भारतीय लेदर, फुटवियर और अन्य उत्पादों के निर्यातक शुल्क में कमी की उम्मीद कर रहे हैं। लेदर और फुटवियर निर्यातक आर.के. जालान के अनुसार, 24 जुलाई के बाद भारतीय सामान पुराने शुल्क के आधार पर अमेरिका भेजे जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि पहले उनके उत्पादों पर करीब 8.5 प्रतिशत शुल्क लगता था, लेकिन अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क जुड़ने के बाद यह बढ़कर 18.5 प्रतिशत हो गया था। शुल्क घटने से निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के सीईओ और महानिदेशक अजय सहाय ने भी कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 24 जुलाई के बाद अमेरिका की शुल्क नीति क्या होगी। हालांकि, अगर भारतीय उत्पाद पुराने शुल्क ढांचे के तहत अमेरिकी बाजार में जाते हैं तो निर्यात में सुधार की संभावना है।

उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका भारत पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी लगाता है तो भी भारतीय निर्यात पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत के उत्पाद कई क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी स्थिति में हैं।

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में भारत व्यापार समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहता। भारत सरकार का कहना है कि समझौते में भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर अवसर मिलना जरूरी है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारत पर 18 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कर चुका है।

वर्तमान परिस्थितियों में व्यापार समझौता भले ही टल गया हो, लेकिन शुल्क में संभावित कमी से भारतीय निर्यातकों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में अमेरिका की नीतियां और भारत-अमेरिका वार्ता की दिशा तय करेगी कि भारतीय निर्यात को कितना फायदा मिलता है।

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