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भारतीय वायुसेना फ्रांस में द्विपक्षीय अभ्यास में शामिल

SHIDDHANT
13 Nov 2025 11:44 PM IST
भारतीय वायुसेना फ्रांस में द्विपक्षीय अभ्यास में शामिल
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Delhi दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) की एक टुकड़ी फ्रांस के मोंट-डे-मार्सन एयर बेस पर पहुंच गई है, जहां वह 16 से 27 नवंबर 2025 तक फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष सेना (FASF) के साथ द्विपक्षीय वायु अभ्यास में भाग लेगी। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच कौशल, संचालन क्षमता और रणनीतिक तालमेल को बढ़ाना है। इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और फ्रांसीसी वायु सेना के राफेल फाइटर विमान शामिल होंगे। दोनों वायु सेनाएं एक वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में प्रशिक्षण लेंगी, जिसमें हवाई मुकाबला, टारगेट अटैक और रक्षा रणनीतियों का अनुकरण किया जाएगा। इससे दोनों देशों की वायु सेनाओं की तैयारी और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन होगा।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यह अभ्यास न केवल दोनों सेनाओं के बीच रणनीतिक तालमेल और भरोसे को मजबूत करेगा, बल्कि श्रेष्ठ अभ्यास विधियों के आदान-प्रदान का भी अवसर प्रदान करेगा। Su-30MKI की बहुमुखी क्षमताओं और राफेल के अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के समन्वित अभ्यास से दोनों देशों के पायलटों की युद्धक दक्षता में वृद्धि होगी। द्विपक्षीय वायु अभ्यास का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता (interoperability) बढ़ेगी। वायु युद्ध की रणनीति, कमांड और कंट्रोल सिस्टम, रेडार और हथियार प्रणालियों का सामंजस्य स्थापित करने के लिए दोनों पक्ष एक-दूसरे के अनुभव और श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करेंगे।

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अभ्यास से न केवल वायु सैनिकों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि दो देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती मिलती है। यह अभ्यास भारत और फ्रांस के बीच सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और गहराएगा। इसके अतिरिक्त, इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ विमान संचालन, रखरखाव और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। यह न केवल भारतीय वायुसेना के पायलटों के कौशल को बढ़ाएगा, बल्कि भारत की भविष्य की अंतरराष्ट्रीय वायु मिशनों में भागीदारी को भी सुदृढ़ करेगा। इस अभ्यास के सफल समापन के बाद दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धक क्षमताओं और प्रशिक्षण में सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा।
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