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Delhi दिल्ली: व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत और पाकिस्तान की रिफाइनरियां प्रभावित हुई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के दोबारा खुलने के बाद तेल आपूर्ति सामान्य होगी और ईंधन की कीमतों में भी राहत मिल सकती है। एबीसी न्यूज के कार्यक्रम "दिस वीक" में बातचीत के दौरान हैसेट ने कहा कि जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पहले की तुलना में बढ़ रही है और यदि जारी वार्ताएं सफल रहती हैं तो स्थिति और बेहतर हो सकती है।
उन्होंने कहा, "जब होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाएगा, तो बड़े तेल टैंकर प्रतिदिन लगभग 300 समुद्री मील की दूरी तय कर सकेंगे। भारत और पाकिस्तान की वे रिफाइनरियां, जो आपूर्ति बाधित होने के कारण काफी हद तक प्रभावित हुई हैं, उन्हें फिर से पर्याप्त मात्रा में तेल मिलने लगेगा। हैसेट ने कहा कि तेल आपूर्ति बहाल होने के बाद रिफाइनरियां उत्पादन बढ़ाएंगी, जिससे परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक कीमतों में कमी आएगी और इसका लाभ विभिन्न देशों तक पहुंचेगा।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए बातचीत कर रहा है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। हैसेट ने दावा किया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह पहले की तुलना में अब जलडमरूमध्य से कहीं अधिक समुद्री यातायात गुजर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ा है और दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि देखी गई है। हैसेट ने स्वीकार किया कि अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से पेट्रोल की कीमतें अधिक हैं। हालांकि वे उतनी नहीं हैं जितनी जो बाइडन के कार्यकाल में अपने चरम स्तर पर थीं, लेकिन फिर भी ऊंची हैं।"
तेल कीमतों में संभावित उछाल को लेकर पूछे गए सवाल पर हैसेट ने कहा कि बाजार ने अब तक उन सबसे खराब आशंकाओं को सही साबित नहीं होने दिया है, जिनकी कुछ विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की थी। उनके अनुसार वैकल्पिक निर्यात मार्गों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव के कारण स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और उसे अमेरिकी प्रशासन की शर्तों पर सहमत होने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए बड़ी चिंता का विषय माना जाता है।
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