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नेपाल में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत ने तेज किया रेस्क्यू ऑपरेशन
jantaserishta.com
27 Aug 2026 5:37 PM IST

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नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद 288 भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है, जबकि अब तक 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीन में भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 200 भारतीय मदद का इंतजार कर रहे हैं। भारत ने नेपाल को राहत सामग्री भेजने के साथ 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम भी बनाया है।
नेपाल में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए अभियान जारी
नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश के कारण पैदा हुए संकट के बीच भारत सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 27 अगस्त को बताया कि नेपाल में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इन लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 21 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका है। मंत्रालय संबंधित एजेंसियों और राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर नजर रख रहा है।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रभावित भारतीय नागरिक कई अलग-अलग समूहों में हैं। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 73 लोग भी शामिल हैं। इसके अलावा तमिलनाडु से जुड़े 37 और 49 लोगों के दो समूह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल के रास्ते गए थे।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय चीन में फंसे
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 200 भारतीय नागरिक चीन की तरफ फंसे हुए हैं। इन लोगों ने मदद के लिए संपर्क किया है। चीन में भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर उनके रेस्क्यू के प्रयास कर रहा है। इनमें ईशा फाउंडेशन से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार चीन में फंसे नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए वहां के स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है।
नेपाल में फंसे भारतीयों के समूहों में पश्चिम बंगाल के 32 नागरिक भी शामिल हैं, जो रसुवा जिले के तिमुरे में थे। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के 61 नागरिकों और केरल के 33 नागरिकों के समूह की भी जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी है।
इस तरह अलग-अलग समूहों में कुल 288 भारतीयों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल को भारत ने भेजी राहत सामग्री
भारत ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए मानवीय सहायता भेजनी शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दो विमानों के जरिए राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है। पहले विमान के जरिए 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी। इसके बाद दूसरा विमान 37.5 टन राहत सामग्री लेकर रवाना हुआ। इसमें करीब 8 टन दवाइयां भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि नेपाल के अनुरोध के आधार पर भारत की ओर से यह सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
भारत राहत और बचाव कार्यों में नेपाल की हर संभव मदद करने की तैयारी में है। इसके लिए बेली ब्रिज तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क और राहत पहुंचाने में मदद मिल सके।
विदेश मंत्रालय में 24 घंटे कंट्रोल रूम
विदेश मंत्रालय ने संकट की स्थिति को देखते हुए एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। यह कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे काम करेगा और नेपाल तथा चीन में फंसे भारतीय नागरिकों से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। मंत्रालय की ओर से हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम के टेलीफोन नंबर सार्वजनिक किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों ने भी 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन शुरू की हैं।
भारत सरकार उन राज्य सरकारों के साथ भी संपर्क में है, जहां से बड़ी संख्या में लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। गृह मंत्रालय के माध्यम से भी संबंधित राज्यों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
फील्ड हॉस्पिटल पर भारत ने क्या कहा?
नेपाल में भारत की ओर से फील्ड हॉस्पिटल भेजे जाने के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेपाल से मिलने वाले अनुरोधों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बातचीत कर हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। भारत ने स्पष्ट किया है कि इस मुश्किल समय में वह नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है।
नेपाल में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। अब तक 270 लोगों की मौत की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 1,000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में भारत की ओर से भेजी जा रही राहत सामग्री और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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