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मोदी के नेतृत्व में भारत ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारियां, NYT ने की तारीफ
jantaserishta.com
31 Aug 2026 1:29 PM IST

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नई दिल्ली: न्यूयॉर्क टाइम्स के एक हालिया विश्लेषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक साझेदारियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पिछले एक साल में व्यापार, तकनीक, निवेश और रणनीतिक सहयोग के लिए कई देशों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है।
मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स के एक विश्लेषण की चर्चा हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत पिछले एक साल के दौरान अलग-अलग देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में जुटा रहा है।
विश्लेषण के मुताबिक, अगस्त 2025 से प्रधानमंत्री मोदी ने कम से कम 20 देशों की यात्राएं की हैं, जबकि 13 देशों के नेता भारत आए हैं। इन मुलाकातों को केवल औपचारिक कूटनीतिक दौरे के तौर पर नहीं देखा गया, बल्कि इनके जरिए व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने की कोशिश की गई।
रिपोर्ट में इस पूरी प्रक्रिया को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों के संदर्भ में भी देखा गया है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने कहा कि भारत की अलग-अलग देशों के साथ साझेदारी को अमेरिका विरोधी कदम के तौर पर देखना सही नहीं है। उनके मुताबिक, एक संप्रभु देश अपने विकास और राष्ट्रीय हितों के लिए जरूरी समझौते करने के लिए स्वतंत्र है।
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ बढ़ा आर्थिक सहयोग
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों का भी इस विश्लेषण में उल्लेख किया गया है। दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते से कई उत्पादों पर शुल्क कम या समाप्त होने की बात कही गई है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन में भारतीय उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, भारत में ब्रिटिश उत्पादों के लिए भी शुल्क में कमी की दिशा में कदम उठाए गए हैं। विश्लेषण में अनुमान जताया गया है कि इससे आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हो सकती है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच भी लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत जनवरी 2026 में पूरी हुई। यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में यूरोपीय बाजार के साथ बेहतर व्यापारिक संबंध भारत के लिए आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
फ्रांस से AI और तकनीक में सहयोग
भारत और फ्रांस के संबंधों में भी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महत्व बढ़ा है। दोनों देशों ने AI, इनोवेशन, रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और फ्रांस ने 2025 के AI एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता की थी। इसके बाद दोनों देशों ने फरवरी 2026 में अपने संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया।
इसके अलावा, भारत और EFTA देशों के बीच आर्थिक साझेदारी के तहत निवेश और रोजगार को लेकर बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। नॉर्वे समेत EFTA देशों की ओर से भारत में लंबे समय में 100 अरब डॉलर के निवेश और करीब 10 लाख रोजगार पैदा करने के लक्ष्य का उल्लेख किया गया है।
दक्षिण कोरिया, जर्मनी और न्यूजीलैंड से रणनीतिक रिश्ते
भारत ने दक्षिण कोरिया के साथ भी जहाज निर्माण और औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होना है। इस दिशा में कोरियाई विशेषज्ञता और भारतीय क्षमता के बीच सहयोग को अहम माना जा रहा है। जर्मनी के साथ संबंधों में रक्षा तकनीक का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण में जर्मनी की पनडुब्बी तकनीक से जुड़े सहयोग का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।
वहीं, न्यूजीलैंड के साथ भारत की बातचीत में समुद्री सुरक्षा और व्यापार का महत्व बढ़ा है। जापान और ऑस्ट्रेलिया भी भारत के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार बने हुए हैं।
भारत अपने विकल्पों का दायरा बढ़ा रहा
इस विश्लेषण का एक प्रमुख पहलू यह है कि भारत किसी एक देश पर अपनी रणनीतिक या आर्थिक निर्भरता रखने के बजाय कई देशों के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है। व्यापार, रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात के दौरान ‘मेलोडी’ टॉफी का पैकेट दिए जाने का भी विश्लेषण में उल्लेख किया गया है। इसे भारत की बहुआयामी कूटनीति के एक छोटे लेकिन दिलचस्प उदाहरण के रूप में देखा गया।
कुल मिलाकर, न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण में भारत की विदेश नीति को इस नजरिए से देखा गया है कि देश बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपने आर्थिक और रणनीतिक विकल्प लगातार बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य केवल अमेरिका के साथ संबंधों को प्रभावित करना नहीं, बल्कि भारत के अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए अलग-अलग देशों के साथ उपयोगी और ठोस साझेदारियां बनाना है।
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