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भारत और जापान तैयार रक्षा संबंधों की मजबूती के लिए, नये मुकाम पर ले जाने को लेकर गंभीर चर्चा

Chandravati Verma
14 Jan 2022 5:16 PM GMT
भारत और जापान तैयार रक्षा संबंधों की मजबूती के लिए, नये मुकाम पर ले जाने को लेकर गंभीर चर्चा
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भारत और जापान आपसी रक्षा संबंधों को नये मुकाम पर ले जाने को लेकर गंभीर चर्चा का दौर शुरू कर चुके हैं।

भारत और जापान आपसी रक्षा संबंधों को नये मुकाम पर ले जाने को लेकर गंभीर चर्चा का दौर शुरू कर चुके हैं। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच हुई टू प्लस टू वार्ता में जो सहमति बनी थी उन्हें इस वर्ष लागू करने के लिए कदम उठाये जाएंगे। शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री हयाशी योशीमासा के बीच वार्ता में रक्षा संबंधों के विभिन्न आयामों को लेकर खास तौर पर बात हुई है।

दोनों देश क्वाड (अमेरिका, आस्ट्रेलिया के साथ मिलकर बनाया गया चार देशों का संगठन) का सदस्य हैं और इन चारों के बीच हर साल सैन्य अभ्यास भी होता है। भारत और जापान इस वर्ष अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना का 70वीं वर्षगांठ बना रहे हैं। जयशंकर और योशीमासा के बीच हुई वार्ता में इस संबंध में भी विमर्श हुआ और आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी विमर्श हुआ है।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की अगुवाई में होने वाली शिखर सम्मेलन का मुद्दा भी उठा लेकिन रक्षा संबंधों की बात सबसे अहम रही। माना जा रहा है कि जल्द ही दोनो देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच होने वाली वार्ता रक्षा समझौतों की दशा तय करेगी। भारत और जापान के बीच जुलाई, 2021 से ही एक्वीजिशन व क्रास सर्वि¨सग एग्रीमेंट (एसीएसए) लागू किया है जिसके बाद दोनो देशों के सैन्य बल एक दूसरे की ज्यादा व्यापक स्तर पर मदद कर सकेंगे।
दोनों तरफ की सेनाएं एक दूसरे के सैन्य अड्डों का भी इस्तेमाल कर सकेंगी। अब दोनो देशों के बीच यह बातचीत हो रही है कि किस तरह से एसीएसए को जमीनी तौर पर लागू करना है। सूत्रों का कहना है कि भारत और जापान के बीच अत्याधुनिक तकनीक के सैन्य इस्तेमाल से जुड़े क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हो रही है। मानवरहित सैन्य वाहनों और रोबोटिक्स के क्षेत्र पर खास तौर पर ध्यान दिया जा रहा है।
माना जा रहा है कि जल्द ही भारत जापान का अमेरिका व ब्रिटेन की तरह ही एक बड़ा सैन्य सहयोगी देश बन जाएगा। हिंद प्रशांत क्षेत्र में दोनो देशों के बीच लगातार विमर्श हो रहा है और इनके बीच सैन्य सहयोग को दिशा देने में हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर एक समान विचारधारा का काफी महत्व है।



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