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दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों और केंद्र सरकार के बीच जारी राजनीतिक टकराव शनिवार को एक नए रूप में सामने आया। INDIA गठबंधन के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। इसके लिए वहां मॉक संसद बनाई गई, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं के साथ उन लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायत की थी। विपक्ष का कहना है कि यह आयोजन चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को सामने लाने के लिए किया गया है। कार्यक्रम के दौरान खरगे सहित कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। हालांकि, ये विपक्षी नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं।
खरगे ने चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक दलों को तोड़ने, सांसदों की खरीद-फरोख्त और सरकारें गिराने जैसी घटनाओं के बाद अब वोटों की चोरी का मुद्दा सामने आ रहा है। खरगे ने दावा किया कि करीब सात महीने पहले संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के 193 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था। उनके मुताबिक, विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस स्वीकार नहीं किए गए और उन पर विचार भी नहीं हुआ।
उन्होंने दिसंबर 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर भी सवाल उठाए। खरगे का कहना था कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को विशेष सुरक्षा दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतीकात्मक महाभियोग का उद्देश्य किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत विरोध जताना नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाना है।
मॉक संसद में आम लोगों ने भी रखी अपनी बात
इस कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि इसमें केवल राजनीतिक नेताओं ने ही अपनी बात नहीं रखी, बल्कि मतदाता सूची से नाम हटने की शिकायत करने वाले कुछ लोगों को भी बोलने का अवसर दिया गया।दिल्ली में रहने वाली अनीता जायसवाल ने बताया कि वह मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली हैं और वर्ष 2012 में दिल्ली में उनका पहचान पत्र बना था। उनका दावा है कि वह लगातार मतदान करती रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके नागरिक होने का प्रमाण मांगने का आधार क्या है और उनके पहचान पत्र को मान्यता देने का अधिकार किसके पास है।
इसी तरह पश्चिम बंगाल के इफ्तिखार अहमद ने भी अपना नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायत रखी। मॉक संसद में मीरा कुमार ने ऐसे लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया, ताकि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर प्रभावित लोगों का पक्ष भी सामने आ सके।
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर वोटों की चोरी कराई जा रही है।
तेजस्वी ने कहा कि इससे आम लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने दावा किया कि देश के लोग इस मुद्दे पर एकजुट हैं और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशों का विरोध करेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अराधना मिश्रा 'मोना' ने एक नवंबर को होने वाली रैली को लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा अभियान बताया। उन्होंने दावा किया कि इस आयोजन में उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
एक नवंबर को रामलीला मैदान में होगी INDIA गठबंधन की रैली
जन महाभियोग कार्यक्रम के बाद विपक्षी गठबंधन की नजर अब एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली पर है। इसके लिए मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के जंक्शन से मार्च शुरू होकर रामलीला मैदान तक पहुंचने का कार्यक्रम तय किया गया है।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस रैली में शामिल होने के लिए शनिवार को कोलकाता से दिल्ली रवाना हुईं। उन्होंने कहा कि वह रामलीला मैदान में होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। उधर, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने अधिकारियों के साथ रामलीला मैदान पहुंचकर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।
इस तरह 31 अक्टूबर को खरगे के आवास पर हुए प्रतीकात्मक आयोजन के बाद एक नवंबर की रैली विपक्षी गठबंधन के लिए अगला बड़ा कार्यक्रम होगी। INDIA गठबंधन इस अभियान के जरिए मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी में है।
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