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घुमारवीं में राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव-2026 का शुभारंभ

Shantanu Roy
6 April 2026 5:18 PM IST
घुमारवीं में राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव-2026 का शुभारंभ
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Ghumarwin. घुमारवीं। घुमारवीं में आयोजित पांच दिवसीय राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव मेला-2026 का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक उल्लास और जनसहभागिता के साथ भव्य तरीके से किया गया। मेले का उद्घाटन संजय कुमार परमवीर चक्र विजेता ने किया, जबकि प्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी शैहज राम शर्मा और शंकर दास वर्मा समेत विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
शुभारंभ की शुरुआत घुमारवीं के ऐतिहासिक शिव मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा से हुई। शोभायात्रा जब मेला मैदान पहुंची, तो खूंटा गाड़ना, बैलों की पूजा-अर्चना और ध्वजारोहण कर मेले का औपचारिक शुभारंभ किया गया। सरस्वती विद्या मंदिर की छात्राओं ने पारंपरिक कहलूरी लोक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं, मांडव्य कला मंच मंडी के कलाकारों ने नागरिया नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। मेले की अध्यक्षता कर रहे एसडीएम गौरव चौधरी ने बताया कि 6 से 9 अप्रैल तक प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्याओं, खेल प्रतियोगिताओं और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष अंजना धीमान, कोऑपरेटिव बैंक निदेशक सुनील शर्मा, तहसीलदार बबीता धीमान, बार एसोसिएशन अध्यक्ष लेख राम नड्डा, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रीता सहगल, उपाध्यक्ष श्याम शर्मा, व्यापार मंडल अध्यक्ष हेमराज और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
एसडीएम गौरव चौधरी ने बताया कि सांस्कृतिक संध्याओं में क्षेत्रीय कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। 6 अप्रैल को गौरव कौंडल, 7 अप्रैल को इशांत भारद्वाज, 8 अप्रैल को कुमार साहिल और 9 अप्रैल को अनुज शर्मा दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। मेले का उद्देश्य न केवल सांस्कृतिक विरासत और लोक कला का संरक्षण करना है, बल्कि क्षेत्रीय कलाकारों को मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को बढ़ावा देना भी है। इसके अलावा, मेले में खेलकूद प्रतियोगिताएं, कुकिंग और शिल्प गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। गौरव चौधरी ने कहा कि राज्य स्तरीय ग्रीष्मोत्सव मेला-2026 में लोगों की जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का प्रसार बढ़ेगा। उन्होंने सभी ग्रामीणों और पर्यटकों से मेला देखने और गतिविधियों में हिस्सा लेने की अपील की। इस मेले में पारंपरिक और आधुनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मिश्रण है, जिससे बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए सांस्कृतिक शिक्षा और मनोरंजन दोनों उपलब्ध होंगे।
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