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Bhubaneswar भुवनेश्वर। ओडिशा में समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और तटीय प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मौजूदगी में राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह MoU भारत-नॉर्वे सहयोग कार्यक्रम ‘INOSOP Phase-II’ (India-Norway Integrated Ocean and Coastal Planning) के तहत किया गया है। इस पहल का उद्देश्य महासागर और तटीय क्षेत्रों के वैज्ञानिक, संतुलित और सतत विकास को सुनिश्चित करना है।
समझौते के तहत समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, तटीय क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, आधुनिक तकनीक और अनुसंधान के माध्यम से समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी काम किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से ओडिशा के तटीय इलाकों में आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास का संतुलन कायम किया जा सकेगा। यह पहल भारत और नॉर्वे के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का हिस्सा है, जो समुद्री क्षेत्र में सतत विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देगा।
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