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विवादित बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया.
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने एक कार्यक्रम में मुसलमानों के लिए कठमुल्ला शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा उन्होंने देश में बहुसंख्यकों के हिसाब से व्यवस्था चलने की बात कही थी। उनके इस बयान को लेकर जमकर विवाद हुआ तो सुप्रीम कोर्ट ने भी इसका संज्ञान लिया। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम के सामने जस्टिस यादव व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए थे। इस बीच कॉलेजियम के मेंबर रहे जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने कई अहम खुलासे किए हैं। उनका कहना है कि जस्टिस शेखर कुमार यादव ने कॉलेजियम के साथ मीटिंग में कहा था कि मैं आप लोगों से माफी मांग लेता हूं। उन्होंने कहा कि मैं आपसे माफी मांगने के लिए तैयार हूं। इस पर चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि बंद कमरे में माफी मांगने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा आपको सार्वजनिक तौर पर करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से 31 जनवरी को रिटायर होने वाले जस्टिस रॉय ने कहा कि जस्टिस शेखर कुमार यादव ने सार्वजनिक माफी की बात को मान लिया था। वह यह कहते हुए मीटिंग से निकले थे, लेकिन आज तक माफी की मांग नहीं की। यही नहीं उन्होंने तो अपने एक जवाब में यहां तक कहा था कि मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। जस्टिस रॉय ने कहा कि ऐसा लगता है कि बाद में उनका विचार बदल गया। पहले तो वह सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के लिए तैयार हो गए थे। जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने उनके इस व्यवहार को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, 'ऐसा एक और वाकया हुआ था, जब एक जज ने ऐसा ही बयान दिया था। तब उन्होंने बाद में माफी मांग ली थी। जस्टिस यादव ने भी पब्लिक में माफी की बात कही, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया है। अब चीफ जस्टिस ने इन-हाउस इन्क्वॉयरी शुरू की है।'
जस्टिस रॉय ने कहा, 'उन्होंने कॉलेजियम के सभी 5 जजों के सामने कहा था कि मैं आप सभी लोगों से माफी मांगता हूं। वह उस समय तैयार थे। लेकिन चीफ जस्टिस ने जब पब्लिक में माफी की मांग की तो वह तैयार हो गए। वहां से निकले तो फिर ऐसा नहीं किया।' समान नागरिक संहिता पर एक भाषण देते हुए जस्टिस शेखर कुमार यादव ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि देश का सिस्टम बहुसंख्यकों के हिसाब से चलेगा। उन्होंने कहा था कि परिवार में आखिर जिस बात को ज्यादा लोग मानते हैं, वही होता है। इसके अलावा उन्होंने मुस्लिमों के लिए कठमुल्ला शब्द का इस्तेमाल किया था। इसी मामले पर उन्हें कॉलेजियम ने समन जारी किया था।
बता दें कि जस्टिस शेखर यादव ने इश मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को जवाब दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि मैं अब भी अपने बयान पर कायम हूं। उनका कहना था कि मैंने अपना बयान जज के तौर पर नहीं बल्कि एक हिंदू के रूप में दिया था। इसलिए अदालत परिसर से बाहर कही गई कोई बात उनके जज रहने की आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करती। इसके अलावा हाई कोर्ट की मर्यादा को भी इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
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