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Gen-Z के प्रदर्शन पर PM मोदी के संदेश का असर, आंदोलन खत्म होने की कहानी

Saba Naaz
25 July 2026 10:00 PM IST
Gen-Z के प्रदर्शन पर PM मोदी के संदेश का असर, आंदोलन खत्म होने की कहानी
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भारत: पेपर लीक के खिलाफ चले छात्र आंदोलन के दौरान सरकार और युवा वर्ग के बीच बनी संवादहीनता को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम का सहारा लिया। प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम रील्स के माध्यम से सीधे Gen-Z से संवाद स्थापित किया और परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई तथा दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का भरोसा दिलाया। इस डिजिटल संवाद को छात्र आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल, पेपर लीक के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शुरू हुई एक व्यंग्यात्मक मुहिम कुछ ही समय में युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गई। कॉकरोच जनता पार्टी नाम के पेज से शुरू हुई ऑनलाइन गतिविधियां देखते ही देखते व्यापक आंदोलन का रूप लेने लगीं। इसके बाद बड़ी संख्या में युवा जंतर-मंतर पहुंचे और सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करने लगे।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सरकार और भाजपा को महसूस हुआ कि युवा पीढ़ी, खासकर Gen-Z के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी को ध्यान में रखते हुए इंस्टाग्राम पर रील्स के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश की। प्रधानमंत्री का यह अंदाज पहले के पारंपरिक भाषणों से अलग था, जिसमें उन्होंने छोटे वीडियो के माध्यम से अपनी बात रखी।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी लंबे भाषणों, बड़े लेखों या पारंपरिक माध्यमों की बजाय छोटे वीडियो और रील्स के जरिए जानकारी हासिल करती है। इंस्टाग्राम Gen-Z के बीच सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म में से एक है, जहां युवा अपनी राय साझा करते हैं और मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इसी कारण प्रधानमंत्री ने युवाओं तक पहुंचने के लिए इस माध्यम को चुना।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इंस्टाग्राम रील में युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक जैसी समस्याओं पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा तथा युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री के इस संदेश को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और प्रतिक्रिया दी।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री की पहली रील को करोड़ों लोगों ने देखा और बड़ी संख्या में युवाओं ने इसे पसंद किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने एक और वीडियो जारी कर युवाओं का धन्यवाद किया। इस वीडियो को भी लाखों लोगों ने देखा। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के इस नए अंदाज की काफी चर्चा हुई और कई युवाओं ने अपनी प्रतिक्रिया भी साझा की।

इस डिजिटल संवाद का असर यह भी रहा कि प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम अकाउंट पर फॉलोअर्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। बताया गया कि युवाओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में 10 लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई।

पेपर लीक आंदोलन के दौरान Gen-Z ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर युवा सड़क पर उतरकर अपनी आवाज भी बुलंद कर सकते हैं। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी ने इस बात को साबित किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आंदोलन को गति देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान युवाओं की बड़ी भागीदारी और लगातार प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री की इंस्टाग्राम रील सामने आई। इसके बाद सरकार और युवाओं के बीच संवाद का एक नया माध्यम तैयार हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय और सरकार अब युवाओं के साथ सोशल मीडिया के जरिए संवाद बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में राजनीतिक और सामाजिक संवाद के तरीके भी बदल रहे हैं। नई पीढ़ी तक पहुंचने के लिए डिजिटल माध्यमों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। पेपर लीक आंदोलन के दौरान इंस्टाग्राम रील्स का इस्तेमाल इसी बदलाव का उदाहरण माना जा रहा है। यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि संवाद और जनभागीदारी का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

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