
यूपी। जेल में बंद यूपी के 14 सदस्यीय धर्मांतरण गैंग के तार मानव तस्करी से भी जुड़े मिल रहे हैं। मोबाइल और लैपटॉप का डाटा खंगालने पर पुलिस के हाथ कुछ सुराग लगे हैं। पुलिस ने इस पहलू से भी जांच शुरू कर दी है कि गैंग मानव अंग तस्करी से जुड़ा तो नहीं हैं। आगरा की सगी बहनों सहित आधा दर्जन युवतियों के धर्मांतरण के आरोप में अब्दुल रहमान, आयशा उर्फ एसबी कृष्णा सहित 14 आरोपित जेल में बंद हैं। आगरा की सगी बहनों के धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने उन्हें पकड़ा था। जांच के दौरान आधा दर्जन और पीड़िताएं सामने आई थीं। चार युवतियों ने कोर्ट में गैंग के खिलाफ बयान दर्ज कराए थे।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया अब्दुल रहमान ने पुलिस को धर्मांतरण के मामले में उलझाए रखा। पुलिस ने दो बार उसका घर खंगाला। इस दौरान पुलिस के हाथ कुछ ऐसे सुराग लगे जिन्होंने होश उड़ा दिए। अब्दुल रहमान के तार मानव तस्करी करने वाले गैंग से भी जुड़े हुए थे। आधा दर्जन नंबर पुलिस को मिले हैं, जो दूसरे प्रदेशों के हैं। मानव तस्करी के पीछे दो खास मकसद होते हैं। देह व्यापार और मानव अंग की तस्करी। अब्दुल रहमान ने पूछताछ में इस बारे में कुछ भी नहीं बताया। पुलिस आधा दर्जन लोगों के बारे में छानबीन कर रही है।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि धर्मांतरण गैंग के पांच सदस्यों का पिछले तीन माह का व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का डेटा भी मिल गया है। उसके जरिए भी पुलिस सुराग जुटाने के प्रयास में लगी है। मानव अंग तस्करी को साबित करने के लिए पीड़ित का होना जरूरी है। ज्यादा जानकारी उन लोगों के बारे में छानबीन से मिलेगी जिन्हें रडार पर लिया गया है। साक्ष्य मिलने पर पुलिस दर्ज मुकदमे में मानव तस्करी और मानव अंग तस्करी से संबंधित धाराएं बढ़ाएगी। धर्मांतरण गैंग युवतियों के साथ गरीब मजदूर वर्ग के लोगों को भी जाल में फंसाया करता था। पुलिस ने इस संबंध में सात राज्यों की पुलिस से संपर्क साधा है। आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप से जो डेटा मिला है उसका सत्यापन कराया जा रहा है। अब्दुल रहमान की जिन नंबरों पर ज्यादा बातचीत होती थी उन सभी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।





