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अंडरवर्ल्ड के लिए कैसे दिल्ली बनी पनाहगाह, जानिए पूरी खबर

Admin Delhi 1
6 Jun 2022 10:39 AM GMT
अंडरवर्ल्ड के लिए कैसे दिल्ली बनी पनाहगाह, जानिए पूरी खबर
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अंडरवर्ल्ड स्पेशल रिपोर्ट: 90 के दशक तक मुम्बई में अंडरवर्ल्ड की दुनिया थी, और यहां के माफिया वालीवुड समेत किडनैपिंग,कांट्रेक्ट किलिंग,जबरन वसूली, सटटा, ड्रग्स, जमीन कब्जाने सहित तस्करी जैसे अपराध को अंजाम देते थे। हालांकि मुम्बई बलास्ट के बाद बनी एटीएस के चक्रव्यूह और ऑपरेशन के बाद मुम्बई से तो गैंगस्टर और गिरोहों का सफाया हो गया, लेकिन राजधानी दिल्ली धीरे धीरे गैंगस्टरों की शरणस्थली बनती गई और मौजूदा समय में इतनी मजबूत हो गई है कि दिल्ली पुलिस के अनेक दावों के बाद यहां के गैंगस्टर हर अपराध को बखूबी अंजाम देते हैं।

इस संबंध में दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी अशोक चांद ने बताया कि राजधानी में गैंगस्टर की नींव 1992 में उस समय पड़ी, जब नजफगढ़ में एक छोटे से जमीन के टुकड़े पर कब्जे और इलाके में दबदबे को लेकर खूनी वार शुरू हुआ। ये वार बलराज अनूप और कृष्ण पहलवान के बीच हुई थी। जिसमें 50 से ज्यादा लोगों की जानें चली गईं। बलराज का 1998 में मर्डर हुआ तो अनूप पहलवान रोहतक कोर्ट में 2003 में पुलिस कस्टडी में मारा गया। यहीं ये गैंगवॉर खत्म हो गई। लेकिन इन्हीं हत्याओं ने बाहरी दिल्ली के कई युवाओं को गैंगस्टर बनने का सपना दिखा दिया। जिसके बाद राजधानी में गिरोह बनते चले गए।

क्यों बनी दिल्ली गैंगस्टरों की पसंद: मुम्बई को आर्थिक राजधानी कहा जाता है, लेकिन जिस तेजी से दिल्ली का विकास हुआ, दिल्ली अपने सिमटे दायरे से बाहर निकलने लगी और विकास के काल में गैंगस्टरों का भी जन्म हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक मुम्बई में एटीएस के लगातार आपरेशनों के बाद ड्रग्स और तस्करी के धंधों को दिल्ली शिफ्ट किया गया। यही नहीं, जैसे दिल्ली ने विस्तार किया तो यहां की जमीनों की कीमतें भी आसमान छूने लगीं। गुरुग्राम, नोएडा समेत एनसीआर में कई विदेशी कंपनियों ने कदम रखे। जिससे अपराधियों को लगा कि मौजूदा समय में यहां पर पैर जमाना ज्यादा मुनासिब रहेगा।

दिल्ली शहर में विकास के साथ जमीनों की कीमतें आसमान छूने लगीं, बाहरी दिल्ली के साथ साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद का विकास भी तेजी से हुआ। बाहरी कपंनियों ने पैर रखने शुरु किए, जिसके बाद से गैंगस्टरों ने अपनी रणनीति को बदलते हुए आपसी गैंगवार को खत्म करके धंधे से जुड़े लोगों से वसूली शुरु कर दी। दिल्ली राजधानी की सीमाएं कई मायनों से गैंगस्टरों के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं। यहां से अपराध करने के बाद वे चंद मिनटों में दूसरे राज्यों में जा सकते हैं, यही नहीं वे दूसरे राज्य में भी बैठे बैठे दिल्ली में अपनी पकड़ आसानी से बना सकते हैं, इसलिए अधिकांश गैंगस्टरों की पहली पसंद अब दिल्ली बन चुकी है।

दिल्ली के बड़े गैंगस्टर,जो कई राज्यों की पुलिस के लिए बने हैं सिरदर्द: कपिल सांगवान उर्फ नन्दू: कपिल सांगवान उर्फ नन्दू मौजूदा समय में लंदन में है,इस पर 12 से ज्यादा हत्या के केस है। इसका मुख्य कारोबार कांट्रैक्ट किलिंग करना, बाहरी दिल्ली में फैक्ट्री मालिकों से रंगदारी वसूलना है। दिल्ली पुलिस ने 2 लाख का ईनाम रखा है। 2019 में ये बदमाश पेरोल पर जेल से बाहर आया था और तभी से फरार है। मकोका में वॉन्टेड ये अपराधी फरार होने के बाद भी हत्या और रंगदारी मांगने की 8 वारदात को अंजाम दे चुका है। इसके गंैग में करीब 30 से ज्यादा सक्रिय सदस्य दिल्ली में और बाहरी राज्यों में करीब 50 से अधिक सदस्य हैं।

नीरज बावनिया-दिल्ली का दाऊदः मौजूदा समय में गैंगस्टर नीरज का नाम लिस्ट में सबसे ऊपर है। तिहाड़ जेल में रहने के दौरान नीरज को दाऊद के करीबी फजल-उर-रहमान के संपर्क में आने और दाऊद के कहने पर डॉन छोटा राजन को धमकाने के मामले के बाद से दिल्ली का दाऊद कहा जाने लगा है। इसके गैंग में 300 से ज्यादा शूटर हैं। हाल में रोहिणी कोर्ट में गैंगस्टर जितेन्द्र गोगी की हत्या नीरज बवाना ने करवाई थी। इससे पहले दिल्ली में सरेआम कोर्ट से निकले तीन गैंगस्टरों को फिल्मी अंदाज में जेलवैन में हत्या करवा चुका है। दाऊद के दुश्मन छोटा राजन को भी दे चुका है धमकी।

गैंगस्टर लारेंस बिश्नोईः लारेंस बिश्नोई का नाम कांग्रेस नेता और पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद से ज्यादा चर्चा में है। लेकिन इससे पहले से बिश्नेाई का नेटवर्क 5 राज्यों में फैला हुआ है और इसके गैंग में 700 से ज्यादा सक्रिय सदस्य हैं। नीरज बवानिया से गैंगवार के चलते ही इसने काला जठेड़ी गैंग से हाथ मिलाया था। मौजूदा समय में वह जेल में बद है। नीरज और उसके सहयोगी गैंग की दहशत से ही लारेंस ने काला जठेड़ी से हाथ मिलाया। अब तक दोनों गैंग के बीच गैंगवार में करीब 40 से ज्यादा हत्याएं हो चुकी हैं। पुलिस के लगातार एनकाउंटर के बाद 4 गैंगों के लोगों ने एक साथ हाथ मिलाया,जिसके बाद सभी ने अपने राज्य बांटे। मौजूदा समय में गोगी की हत्या के बाद बाक्सर इसका दायां हाथ है। मौजूदा समय में 700 से ज्यादा एक्टिव गैंगस्टर करीब 30 से अधिक पेशवर शूटर भी इसमें शामिल हैं।

विजय सिंह उर्फ पहलवान: वसंत कुंज नॉर्थ थाने के इस घोषित बदमाश पर एक लाख का ईनाम है। मर्डर केस में 2011 में पेरोल लेकर जेल से बाहर आया और फरार हो गया। इस पर पहले से मर्डर, हत्या के प्रयास और कब्जा करने समेत 24 केस दर्ज हैं। ये 2011 में वसंत कुंज नॉर्थ के किडनैपिंग के बाद मर्डर और 2019 में किशनगढ़ के रंगदारी के एक मामले में वॉन्टेड है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल ये अंडरग्राउंड और साइलेंट है।

राकेश उर्फ राका: ये टिल्लू ताजपुरिया का शार्पशूटर है, दिल्ली में 2013 में केशवपुरम में हुई लूट में शामिल रहा है। 2015 में इस बदमाश ने रोहिणी में किडनैपिंग और मर्डर को अंजाम दिया। अभी फरार है।

विकास डबास उर्फ भोलू फौजी: भोलू फौजी पर 50 हजार का ईनाम है और ये दिल्ली के सुल्तानपुर डबास का रहने वाला है। नीरज बवाना गैंग का गुर्गा है और दाल मिल मालिक से 1 करोड़ की रंगदारी मांगने में वॉन्टेड है। 8 केस दर्ज हैं। अभी फरार है।

अनुज उर्फ मोहित लाम्बा: मोहित लाम्बा पर दिल्ली पुलिस ने 1 लाख 30 हजार का ईनाम रखा है। हरियाणा के झज्जर जिले का रहने वाला ये बदमाश लूटपाट के केस में जेल जा चुका है और बाहर आने के बाद अलग-अलग गैंगस्टर के लिए काम करता है। बीते साल कापसहेड़ा में हुए मर्डर में मोहित लाम्बा वॉन्टेड है।

शाहरुख: जेल में बंद यमुनापार के गैंगस्टर हाशिम बाबा का गुर्गा है। शुरुआती दिनों में शाहरुख बच्चा गैंग के लिए काम करता था। 2015 में गैंगस्टर इरफान पर हमला शाहरुख ने ही किया था। बीते डेढ़ साल में शाहरुख 4 मर्डर कर चुका है और इस पर दिल्ली पुलिस ने 2 लाख का ईनाम रखा है। इस बदमाश के सहयोगी पकड़े जा चुके हैं, लेकिन शाहरुख अब तक फरार है।

विकास गुलिया उर्फ लगरपुरिया: हरियाणा के झज्जर का विकास 1.10 लाख का ईनामी है। राम लाल आनंद कॉलेज में पढऩे के दौरान ये नजफगढ़ इलाके के एक अखाड़े में जाने लगा। यहां से गैंगस्टर धीरपाल उर्फ काना के संपर्क में आया। काना की गैंगस्टर मंजीत महाल से गैंगवार हुई तो काना और लगरपुरिया ने गैंग बना लिया। मर्डर, रंगदारी और जमीन कब्जाने के 14 केस दर्ज हैं। मकोका में 2015 से वॉन्टेड है और साइलेंट है।

समुंदर खत्री उर्फ सुरेंद्र उर्फ सुरेश: नरेला के मामुरपुर के रहने वाले समुंदर की कई संगीन वारदातों में तलाश है। इस पर नरेला और सोनीपत में मर्डर समेत कई केस दर्ज हैं। जेल से बाहर आने के बाद 2015 में दिल्ली पुलिस और हरियाणा के कान्स्टेबल की हत्या में इसकी तलाश है। इस पर 3 लाख का ईनाम है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल ये अंडरग्राउंड है।

शाहरुख: जेल में बंद यमुनापार के गैंगस्टर हाशिम बाबा का गुर्गा है। शुरुआती दिनों में शाहरुख बच्चा गैंग के लिए काम करता था। 2015 में गैंगस्टर इरफान पर हमला शाहरुख ने ही किया था। बीते डेढ़ साल में शाहरुख 4 मर्डर कर चुका है और इस पर दिल्ली पुलिस ने 2 लाख का ईनाम रखा है। इस बदमाश के सहयोगी पकड़े जा चुके हैं, लेकिन शाहरुख अब तक फरार है।

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