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स्मार्ट चश्मे से नकल करने वालों पर कैसे लगेगी रोक?, परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक नकल रोकने नया कदम
jantaserishta.com
1 Nov 2026 3:29 PM IST

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स्मार्ट चश्मे ने बढ़ाई परीक्षा एजेंसियों की चिंता.
नई दिल्ली: राजस्थान में सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं को नकल से मुक्त रखने के लिए कर्मचारी चयन बोर्ड सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव करने जा रहा है। अब परीक्षा केंद्रों के हर कक्ष में कम क्षमता वाले जैमर लगाने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य ऐसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल को रोकना है, जिनकी मदद से अभ्यर्थी बिना मोबाइल फोन निकाले भी परीक्षा से जुड़ी जानकारी बाहर भेज सकते हैं।
इस व्यवस्था के लिए कर्मचारी चयन बोर्ड ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद आगामी परीक्षाओं में इसे लागू किया जा सकता है। बोर्ड का दावा है कि जैमर का प्रभाव केवल परीक्षा कक्ष तक सीमित रहेगा। इससे परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद लोगों के मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन पर असर नहीं पड़ेगा।
स्मार्ट चश्मे ने बढ़ाई परीक्षा एजेंसियों की चिंता
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नकल करने के तरीके भी बदल रहे हैं। पहले मोबाइल फोन या ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल के मामले सामने आते थे, लेकिन अब स्मार्ट चश्मे जैसी तकनीक ने परीक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
मेटा ग्लासेस देखने में आम चश्मे जैसे होते हैं, इसलिए पहली नजर में इन्हें पहचानना आसान नहीं होता। इनमें कैमरा, माइक्रोफोन, स्पीकर और ब्लूटूथ जैसी सुविधाएं मौजूद रहती हैं। इनकी मदद से पहनने वाला व्यक्ति आसपास की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है।
परीक्षा के दौरान कोई अभ्यर्थी इस तरह के चश्मे का गलत इस्तेमाल करके प्रश्नपत्र की तस्वीर या वीडियो बना सकता है। इसके बाद उपलब्ध वायरलेस कनेक्टिविटी के जरिए जानकारी बाहर भेजकर उत्तर हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। यही वजह है कि बोर्ड अब परीक्षा कक्षों में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को नियंत्रित करने की तैयारी कर रहा है।
जैमर लगने से कैसे रुकेगी नकल?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत परीक्षा कक्ष में कम क्षमता वाले जैमर लगाए जाएंगे। ये उपकरण अपने निर्धारित दायरे में वायरलेस रेडियो सिग्नल को बाधित करते हैं। इससे वाई-फाई और ब्लूटूथ जैसे कनेक्शन काम नहीं कर पाते।
ऐसी स्थिति में स्मार्ट चश्मे का दूसरे उपकरणों से संपर्क टूट सकता है। यानी चश्मे से रिकॉर्ड की गई जानकारी को तुरंत बाहर भेजना मुश्किल हो जाएगा। इससे परीक्षा के दौरान बाहर बैठे किसी व्यक्ति से संपर्क करके उत्तर मंगाने की कोशिश पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, जैमर हर तरह की रिकॉर्डिंग को रोकने में सक्षम नहीं होता। स्मार्ट चश्मे में मौजूद मेमोरी में वीडियो या तस्वीरें ऑफलाइन सुरक्षित रह सकती हैं। इसलिए केवल जैमर लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा कक्ष में अन्य सुरक्षा उपाय भी जरूरी रहेंगे।
बायोमीट्रिक जांच और सीसीटीवी से भी होगी निगरानी
कर्मचारी चयन बोर्ड पहले से ही परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठा रहा है। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमीट्रिक जांच शुरू की जा चुकी है। इसके अलावा परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
इन उपायों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा में किसी दूसरे व्यक्ति की जगह कोई और अभ्यर्थी न बैठे और परीक्षा के दौरान होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। जैमर की व्यवस्था लागू होने पर निगरानी के साथ-साथ वायरलेस संचार पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
बोर्ड अध्यक्ष ने बताई योजना की अहमियत
कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार, परीक्षा केंद्रों में कम क्षमता वाले जैमर लगाने से इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे आधुनिक उपकरणों के जरिए नकल करने की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।
फिलहाल इस योजना का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने और जरूरी तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद इसे आगामी परीक्षाओं में लागू किया जा सकता है। बोर्ड की कोशिश है कि परीक्षा में मेहनत और योग्यता के आधार पर ही अभ्यर्थियों का चयन हो और किसी को तकनीक का गलत इस्तेमाल करके अनुचित फायदा उठाने का मौका न मिले।
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