
Bharat: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) ने जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधकों और भर्ती करने वाली कंपनियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न किया जाए।
डीजीएमए की ओर से जारी आदेश में जहाज कंपनियों को सुरक्षा स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यह फैसला उस समय लिया गया है जब मध्य पूर्व के इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का संघर्ष या हमला वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया में समुद्री कर्मचारियों यानी सीफेयरर्स का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है। दुनियाभर के अलग-अलग जहाजों पर 3 लाख से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डीजीएमए का यह कदम हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद उठाया गया है। बताया जा रहा है कि पिछले तीन दिनों में हुए अलग-अलग हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद भारतीय समुद्री प्रशासन ने नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक विवादों के कारण खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात कई बार गंभीर हो चुके हैं। होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी सैन्य गतिविधि का सीधा असर वहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर पड़ सकता है।
भारतीय समुद्री क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जहाज कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे जोखिम वाले इलाकों में कर्मचारियों की तैनाती को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें और सुरक्षा मानकों का पालन करें।
इस एडवाइजरी का असर उन भारतीय नाविकों पर पड़ सकता है जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ काम करते हैं। हालांकि, यह प्रतिबंध स्थायी नहीं बताया जा रहा है और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद आगे के फैसले लिए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ना केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत सरकार और समुद्री प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय नाविकों की सुरक्षा को देखते हुए जारी की गई यह चेतावनी बताती है कि मध्य पूर्व के मौजूदा हालात को लेकर भारत सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए पहले से कदम उठा रहा है।





