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क्षेत्र में सामने आए आतंकी घटनाक्रम
Shrinagar श्रीनगर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज जम्मू-कश्मीर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक में केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ, कानून-व्यवस्था और आगामी सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। हाल के महीनों में कुछ इलाकों में आतंकवादी गतिविधियों और सुरक्षा बलों के अभियानों को देखते हुए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री की इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी, सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में जमीनी हालात, आतंकियों के मूवमेंट, स्थानीय नेटवर्क और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी।
बताया जा रहा है कि बैठक में आतंकियों के खिलाफ चल रहे अभियानों, सुरक्षा बलों की तैनाती, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बलों की जरूरत और खुफिया तंत्र को और मजबूत करने पर भी मंथन होगा। इसके साथ ही सीमा पर घुसपैठ रोकने के उपायों और ड्रोन के जरिए हथियार व नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों पर भी चर्चा की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्री अमित शाह आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दे सकते हैं। केंद्र सरकार का जोर इस बात पर है कि जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता बनी रहे और आम नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
बैठक में हाल के समय में जम्मू क्षेत्र में सामने आए आतंकी घटनाक्रम, राजौरी और पुंछ जैसे इलाकों में सुरक्षा स्थिति, तथा कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकियों के नेटवर्क पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, आगामी महीनों में होने वाले त्योहारों, यात्राओं और संभावित चुनावी गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। अमित शाह पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का पूरी तरह सफाया केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उनके कार्यकाल में आतंकियों के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत किया गया है।
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बैठक के दौरान स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने, पत्थरबाजी जैसी घटनाओं पर रोक और सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समीक्षा बैठक आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करेगी। केंद्र सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
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