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पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह, एक के बाद एक बीजेपी नेता छोड़ रहे पार्टी

jantaserishta.com
5 May 2022 6:32 AM GMT
पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह, एक के बाद एक बीजेपी नेता छोड़ रहे पार्टी
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नई दिल्ली: 'दो मई...दीदी गई'. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने ये नारा 2021 में दिया था. अब साल 2022 है. दीदी यानी ममता बनर्जी बंगाल से तो नहीं गईं लेकिन चुनाव हारने के बाद बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व बंगाल का रास्ता लगभग भूल ही गया. अब विधानसभा चुनाव नतीजों के ठीक एक साल बाद गृह मंत्री अमित शाह पहली बार बंगाल का दौरा कर रहे हैं.



अमित शाह के सामने बंगाल में कई चुनौतियां है. बंगाल में बीजेपी जबर्दस्त अंतर्कलह से जूझ रही है. दिग्गज नेता पार्टी छोड़ कर ममता के खेमे में जा रहे हैं. इस लिस्ट में मुकुल रॉय, बाबुल सुप्रियो जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कई विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं. इन चुनौतियों से निपटने बीजेपी के रणनीतिकार और मैनेजमेंट गुरु अमित शाह गुरुवार को बंगाल पहुंच गए हैं.
बंगाल में अमित शाह कुछ सरकारी कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे. लेकिन सिलीगुड़ी में उनकी रैली अहम है जहां बीजेपी एक बार फिर से अपना शक्ति प्रदर्शन करेगी. अमित शाह का सबसे अहम कार्यक्रम 6 मई को कोलकाता में है जहां वो बीजेपी के सांसदों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों से मिलकर फीडबैक लेंगे और पार्टी में उभर रहे असंतोष के स्वर का निदान खोजना चाहेंगे.
पिछले साल इसी समय जब बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो बीजेपी के 77 विधायक जीते. लेकिन कुछ ही महीने बाद बीजेपी के विधायक टूटने शुरू हो गए. हाल ही में विधायक कृष्ण कल्याणी, विश्वजीत दास बीजेपी छोड़ चुके हैं.
मार्च महीने में बीजेपी से निलंबित बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार भी टीएमसी में शामिल हो गए थे. अमित शाह के उत्तर 24 परगना दौरे से पहले भी कई बीजेपी नेताओं के इस्तीफा देने की खबरें हैं.
बंगाल बीजेपी में खटपट सिर्फ छोटे नेताओं में ही नहीं है. राज्य का शीर्ष नेतृत्व ही टकराव का शिकार है. कुछ ही दिन पहले बंगाल में बीजेपी का नेतृत्व करने के लिए "अनुभव की आवश्यकता" को लेकर प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के बीच जुबानी जंग चल रही थी. हालांकि अमित शाह के दौरे से पूर्व इन दोनों से मंच साझा किया है. निश्चित रूप से अमित शाह के लिए पार्टी की ये गुटबाजियां मुश्किलें बढ़ाने वाली हैं.
बैरकपुर से बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह कभी बंगाल में बीजेपी के दबंग नेता के रूप में देखे जाते थे. लेकिन जूट की कीमतों पर वो भी बीजेपी नेतृत्व से बागी तेवर दिखाते नजर आ रहे हैं. उन्होंने जूट कॉरपोरेशन में घोटाले का आरोप लगाया है और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की नीतियों की लगातार आलोचना कर रहे हैं. बात इतनी बढ़ी कि पीयूष गोयल ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया भी.
गुटबाजी, अपनी ढपली, अपना राग की वजह से पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह गायब है. एक साल में हुए हर चुनाव में पार्टी को हार झेलनी पड़ी है. आसनसोल उपचुनाव में बीजेपी के लिए स्थिति बेहद शर्मनाक रही जब टीएमसी कैंडिडेट शत्रुघ्न सिन्हा ने बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल को 3 लाख से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी. बालीगंज में भी बाबुल सुप्रियो ने जीत हासिल कर बीजेपी के जख्म को और भी हरा कर दिया.
अमित शाह बंगाल ऐसे माहौल में पहुंच रहे हैं जब पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला नीचे गिरा है. इसी हालात में 2023 में बंगाल में पंचायत चुनाव है, आम चुनाव से पहले ये चुनाव बीजेपी के लिए टेस्ट साबित होने वाले हैं. चुनावी सफलता के रथ पर सवार ममता बनर्जी बीजेपी के सामने 2024 में बड़ी चुनौती हैं. बता दें कि 2019 में बीजेपी ने बंगाल में 42 में से 18 सीटें जीती थीं. जबकि टीएमसी 34 से 22 पर आ गई थी.
अमित शाह के सामने इन तमाम उथल-पुथल के बीच सामंजस्य बिठाने की चुनौती है. हालांकि इस टास्क में उन्हें संघ का साथ मिलेगा. संघ प्रमुख मोहन भागवत पिछले ही दिनों बंगाल के दौरे पर गए थे.
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