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पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री का बड़ा बयान
Delhi दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर आधारित पुस्तक 'RSS @ 100: A Century of Service, Unity & Sacrifice' के विमोचन कार्यक्रम में कहा कि स्वामी विवेकानंद हिंदू धर्म को केवल एक धर्म नहीं, बल्कि इस भूमि की सांस्कृतिक चेतना और साझा विरासत मानते थे। उन्होंने कहा कि यह हमारी आध्यात्मिक परंपरा और समग्र जीवन दृष्टि का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर (गुरुजी) के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1972 के एक साक्षात्कार में गुरुजी ने स्पष्ट कहा था कि राष्ट्र के संदर्भ में वह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच कोई भेदभाव नहीं करते थे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि गुरुजी का मानना था कि संघ की विचारधारा केवल सहिष्णुता (Tolerance) तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान (Respect) और स्वीकार्यता (Acceptance) पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विविधताओं को साथ लेकर चलने और सभी समुदायों के प्रति सम्मान का संदेश देती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान समावेशी रही है और यही विचार स्वामी विवेकानंद के दर्शन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि समाज में एकता, सेवा और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के लिए ऐसे विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
यह कार्यक्रम आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा पर आधारित पुस्तक 'RSS @ 100: A Century of Service, Unity & Sacrifice' के विमोचन के अवसर पर आयोजित किया गया। इस पुस्तक का लेखन श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी ने किया है। कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
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