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लाहौर। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की तीन बहनों की हिरासत को लेकर लाहौर हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने पंजाब के गृह सचिव और कोट लखपत जेल अधीक्षक को 28 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामला इमरान खान की बहनों अलीमा खान, नूरीन नियाजी और उज्मा खान की हिरासत से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्धारित हिरासत अवधि समाप्त होने के बावजूद तीनों को जेल में रखा गया है।
हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद भी जेल में रखने का आरोप
मामले की सुनवाई गुरुवार को लाहौर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अबहर गुल खान ने की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील राणा मुदस्सर उमर ने अदालत को बताया कि तीनों महिलाओं की 30 दिन की हिरासत अवधि 19 और 20 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है।
वकील ने दलील दी कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद उन्हें कोट लखपत जेल से रिहा नहीं किया गया। उन्होंने इसे कानून और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
अलीमा खान के बेटे ने दाखिल की याचिका
इमरान खान की बहन अलीमा खान के बेटे शाहरिज खान ने अदालत में नई याचिका दाखिल की है। याचिका में तीनों महिलाओं को अदालत के समक्ष पेश करने और उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि हिरासत संबंधी आदेश की वैधता समाप्त होने के बाद भी उन्हें जेल में रखना उचित नहीं है। हालांकि, इस दावे पर अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
सितंबर में हिरासत में ली गई थीं तीनों बहनें
रिपोर्टों के मुताबिक, अलीमा खान को 20 सितंबर को हिरासत में लिया गया था, जबकि नूरीन नियाजी और उज्मा खान को 21 सितंबर को हिरासत में लिया गया।
तीनों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी एमपीओ अध्यादेश के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई पीटीआई के सरकार विरोधी प्रदर्शन की तैयारियों के दौरान हुई थी।
28 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह भी सवाल उठाया कि लाहौर के डिप्टी कमिश्नर को याचिका में पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया। वकील ने जवाब दिया कि उनके द्वारा जारी हिरासत आदेश की अवधि समाप्त हो चुकी है।
इसके बाद अदालत ने पंजाब के गृह सचिव और जेल अधीक्षक को पेश होने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर निर्धारित की है।
अब अगली सुनवाई में अधिकारियों के जवाब और हिरासत की कानूनी स्थिति पर अदालत के रुख का इंतजार रहेगा।
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