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हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद, बर्फबारी के बीच गूंजे शब्द कीर्तन

jantaserishta.com
10 Oct 2026 10:39 PM IST
हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद, बर्फबारी के बीच गूंजे शब्द कीर्तन
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चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के साथ कपाट बंद करने की प्रक्रिया संपन्न हुई। इस दौरान गुरुद्वारा परिसर में सुखमनी साहिब का पाठ, शब्द कीर्तन और अंतिम अरदास की गई। कपाट बंद होने से पहले धाम में बर्फबारी हुई, जिससे पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर से ढक गया। इस वर्ष 23 मई से शुरू हुई यात्रा का 10 अक्टूबर को समापन हो गया।
हेमकुंड साहिब में शनिवार सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह सुखमनी साहिब के पाठ के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। इसके बाद शब्द कीर्तन किया गया। दोपहर 12:30 बजे अंतिम अरदास हुई और दोपहर एक बजे कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान सिख धर्म की परंपराओं का पालन करते हुए पंच प्यारों की अगुवाई में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को दरबार साहिब से सचखंड में सुशोभित किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष की हेमकुंड साहिब यात्रा औपचारिक रूप से समाप्त हो गई।
कपाट बंद होने से पहले धाम में हुई बर्फबारी ने पूरे क्षेत्र का दृश्य बदल दिया। पहाड़ों और गुरुद्वारा परिसर के आसपास बर्फ की सफेद चादर दिखाई दी। ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र तीर्थस्थल में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण यात्रा संचालित करना कठिन हो जाता है। इसी वजह से हर वर्ष निर्धारित अवधि के बाद कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
इस वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा 23 मई को शुरू हुई थी। यात्रा अवधि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम में मत्था टेका। हालांकि, दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की अंतिम आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं कराई गई है। हेमकुंड साहिब सिख धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह गुरुद्वारा अपनी धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पर्वतीय मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है।
धाम समुद्र तल से लगभग 4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऊंचाई के कारण यहां मौसम तेजी से बदल सकता है। विशेष रूप से सर्दियों के दौरान बर्फबारी के कारण आसपास के रास्ते बर्फ से ढक जाते हैं। हेमकुंड साहिब की यात्रा का सिख श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व है। यहां गुरु गोबिंद सिंह से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु गुरुद्वारे में मत्था टेककर अरदास करते हैं।
कपाट बंद होने के साथ ही अब इस यात्रा सीजन की धार्मिक गतिविधियां समाप्त हो गई हैं। अगली यात्रा के लिए कपाट खुलने की तारीख संबंधित प्रबंधन की ओर से निर्धारित की जाएगी। शनिवार को अंतिम अरदास और गुरु ग्रंथ साहिब को सचखंड में सुशोभित किए जाने के साथ इस वर्ष की यात्रा का समापन हुआ। बर्फबारी के बीच संपन्न हुई कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया ने इस अवसर को विशेष बना दिया।
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