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पार्टी फंड से खरीदे गए हेलीकॉप्टर और लग्जरी जेट, फिर...ED की जांच में बड़ा खुलासा
jantaserishta.com
9 July 2026 6:01 PM IST

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नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने पार्टी के तीन बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं. ED का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं, जिनसे यह संदेह पैदा हुआ है कि पार्टी के पैसों से एक लग्जरी बिजनेस जेट और एक वीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदा गया, लेकिन बाद में उन्हीं विमानों को किराए पर लेकर इस्तेमाल किया गया.
यह पहली बार है जब ED किसी राजनीतिक दल की फंडिंग की स्वतंत्र रूप से मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है. इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के अकाउंट की जांच दिल्ली आबकारी नीति मामले के तहत की गई थी.यह पूरा मामला कोलकाता स्थित एविएशन मैनेजमेंट और लीजिंग कंपनी Carewell Aviation India Pvt Ltd पर ED की छापेमारी के बाद सामने आया. एजेंसी के मुताबिक, यह कंपनी सितंबर 2021 में बनाई गई थी. इसी साल पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी.
ED के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच TMC के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन को ट्रांसफर किए गए. जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने इनमें से 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को भेज दिए.
ED का आरोप है कि TMC से मिले पैसों का इस्तेमाल कर केयरवेल एविएशन ने करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से एक Embraer Legacy 600 बिजनेस जेट और एक Agusta 109 SP हेलिकॉप्टर खरीदा.
Embraer Legacy 600 ब्राजील की कंपनी Embraer द्वारा निर्मित एक मिड-साइज लग्जरी बिजनेस जेट है, जिसमें फ्लैट बेड में बदलने वाली सीटें और वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध हैं. वहीं Agusta 109 SP इटली की कंपनी Leonardo (पूर्व में AgustaWestland) का हाई-स्पीड ट्विन इंजन वीआईपी हेलिकॉप्टर है.
ED की जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए केमैन आइलैंड्स स्थित एक कंपनी से लगभग 16 करोड़ रुपये (करीब 17 लाख अमेरिकी डॉलर) का असुरक्षित कर्ज (Unsecured Loan) लिया गया था.
केमैन आइलैंड्स दुनिया भर में ऑफशोर कंपनियों के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है. एजेंसी अब इस विदेशी फंडिंग के सोर्स और उद्देश्य की भी जांच कर रही है. ED की जांच का सबसे अहम पहलू यही है कि जिन विमानों को कथित तौर पर TMC के फंड से खरीदा गया, बाद में वही विमान पार्टी को किराए पर दिए गए. एजेंसी का कहना है कि विमान खरीदने के बाद केयरवेल एविएशन ने उन्हें TMC को चार्टर सेवा के रूप में उपलब्ध कराया और विमान इस्तेमाल करने के नाम पर पार्टी से लगातार भुगतान लिया गया.
सरल शब्दों में समझें तो यह ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति अपने ही पैसे से कार खरीदे, लेकिन बाद में उसी कार का इस्तेमाल करने के लिए हर बार किराया भी देता रहे. ED को शक है कि यह पूरा सिस्टम असली लेनदेन को छिपाने और पार्टी के फंड को दूसरी जगह ट्रांसफर करने (Siphoning of Funds) के उद्देश्य से बनाई गया हो सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी जांच जारी है और एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है.
बांग्ला दैनिक आनंदबाजार पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, केयरवेल एविएशन पश्चिम बंगाल के कई वीवीआईपी नेताओं को चार्टर विमान उपलब्ध कराती थी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इस कंपनी की चार्टर सेवाओं का इस्तेमाल करते थे. ED का कहना है कि यही वजह है कि विमान खरीद और उसके बाद हुए भुगतान की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है.
यह जांच बिधाननगर पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR के आधार पर शुरू हुई. शिकायत तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक बिश्वनाथ दास ने दर्ज कराई थी. बिश्वनाथ दास मई महीने में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे. इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर वित्तीय जांच शुरू की.
तृणमूल कांग्रेस ने ED की कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है. पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि उसके सभी वित्तीय लेनदेन पूरी पारदर्शिता के साथ किए गए हैं. पार्टी का कहना है कि सभी चंदों और दान की जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग और आयकर विभाग को दी गई है. इसके अलावा इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियां भी पहले ही भारतीय स्टेट बैंक के जरिये सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं.
TMC ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए कर रही है. फिलहाल ED की जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर विमान और हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए धन पार्टी की ओर से दिया गया था, तो फिर उन्हीं विमानों के इस्तेमाल के लिए पार्टी को दोबारा किराया क्यों देना पड़ा? एजेंसी इसी वित्तीय मॉडल और पैसों के सोर्स की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. वहीं तृणमूल कांग्रेस सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बता रही है.
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