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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपियों की जमानत पर अब 19 सितंबर को सुनवाई

SHIDDHANT
15 Sept 2026 9:59 PM IST
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपियों की जमानत पर अब 19 सितंबर को सुनवाई
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Ayodhya. अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की जमानत याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई फिलहाल टल गई है। दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अब 19 सितंबर को सुनवाई होगी। लीगल एंड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ कुलशेखर सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी। कुलशेखर सिंह के मुताबिक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव पर राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का आरोप है। दोनों की ओर से जमानत के लिए अदालत में आवेदन दाखिल किए गए थे। इन आवेदनों पर 15 सितंबर को सुनवाई निर्धारित की गई थी, लेकिन जांच अधिकारी की ओर से आवश्यक टिप्पणी अदालत के समक्ष पेश नहीं किए जाने के कारण सुनवाई आगे बढ़ा दी गई।
कुलशेखर सिंह ने बताया कि उन्होंने दोनों आरोपियों की जमानत के लिए 5 सितंबर को आवेदन दाखिल किए थे। इसके बाद अदालत ने सुनवाई के लिए पहली तारीख 15 सितंबर निर्धारित की थी। तय तारीख पर जमानत आवेदनों पर सुनवाई होनी थी, लेकिन मामले के जांच अधिकारी की ओर से जमानत याचिकाओं के संबंध में जरूरी रिपोर्ट या टिप्पणी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके चलते अदालत ने संबंधित पक्ष को और समय देते हुए जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अगली तारीख निर्धारित कर दी। अब दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर 19 सितंबर को अदालत में सुनवाई की जाएगी।
मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ा बताया गया है। मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया है। फिलहाल उनके खिलाफ आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अदालत में मामले की सुनवाई जारी है। बचाव पक्ष की ओर से जमानत की मांग करते हुए अदालत में आवेदन पेश किए गए हैं। अब अगली सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी की टिप्पणी आने के बाद अदालत दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर विचार कर सकती है। फिलहाल जमानत देने या खारिज करने को लेकर अदालत ने कोई निर्णय नहीं दिया है। 19 सितंबर की सुनवाई में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। मामले में दोनों व्यक्तियों को अभी आरोपी के रूप में ही उल्लेख करना उचित है, क्योंकि आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है।
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