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सरकारी स्कूल में शराब के नशे में पहुंचे हेडमास्टर, भोजन बनाने का डाला दबाव

Shantanu Roy
13 July 2026 10:59 PM IST
सरकारी स्कूल में शराब के नशे में पहुंचे हेडमास्टर, भोजन बनाने का डाला दबाव
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Beawar. ब्यावर। राजस्थान के ब्यावर जिले के जवाजा क्षेत्र स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल शिवनाथपुरा में हेडमास्टर के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि हेडमास्टर ने स्कूल पहुंचने के बाद रसोई में जाकर बच्चों के भोजन से पहले खुद के लिए खाना बनाने का दबाव डाला। मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों ने विरोध जताया, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए हेडमास्टर को एपीओ कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10 बजे स्कूल के हेडमास्टर मुकेश कुंडिया कथित तौर पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। स्कूल में मौजूद स्टाफ और ग्रामीणों को उनके व्यवहार पर शक हुआ। इसके बाद जब मामले की जानकारी अभिभावकों और ग्रामीणों को मिली तो वे स्कूल पहुंच गए और हेडमास्टर की हरकतों का विरोध किया। ग्रामीणों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि हेडमास्टर मुकेश कुंडिया पहले भी कई बार शराब पीकर स्कूल आते रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। सोमवार को भी उन्होंने रसोई में जाकर खाना बनाने वाली महिला से पहले अपने लिए भोजन तैयार करने को कहा, जबकि बच्चों के लिए भोजन बाद में बनाने की बात कही।
घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। तहसीलदार हनुत सिंह ने स्कूल पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद हेडमास्टर को मेडिकल जांच के लिए ब्यावर के अमृतकौर अस्पताल भेजा गया। जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा के निर्देश पर हेडमास्टर का मेडिकल परीक्षण कराया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के आधार पर हेडमास्टर मुकेश कुंडिया को एपीओ कर दिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में अनुशासनहीनता और इस तरह की लापरवाही को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, हेडमास्टर मुकेश कुंडिया ने ग्रामीणों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वह बीमार हैं और लंबे समय से डिप्रेशन की दवा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने दवाई ली थी, इसलिए ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। फिलहाल शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। घटना के बाद स्कूल में बच्चों और अभिभावकों के बीच चर्चा का माहौल बना हुआ है।
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