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नौकरी के लिए गया था विदेश चार महीने बाद आंखों में आंसू लेकर लौटा घर

SHIDDHANT
22 Sept 2026 10:38 PM IST
नौकरी के लिए गया था विदेश चार महीने बाद आंखों में आंसू लेकर लौटा घर
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पैसे खत्म खाने के पड़े लाले फिर ऐसे वतन लौटा उमाशंकर
Muzaffarpur. मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड के कोठियां गांव निवासी उमाशंकर कुमार करीब चार महीने बाद पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल से अपने घर लौट आया। सोमवार देर शाम घर पहुंचते ही पत्नी चांदनी देवी और बच्चों ने उसे गले लगा लिया। परिवार से लंबे समय बाद मिलने पर उमाशंकर भावुक हो गया और उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उमाशंकर के मुताबिक परिवार में बेटी की शादी को लेकर आर्थिक परेशानी थी। इसी दौरान एक परिचित ने उसे सेनेगल की राजधानी डकार में 60 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिलने की जानकारी दी। बेहतर कमाई की उम्मीद में वह 17 मई 2026 को सेनेगल पहुंचा।
उमाशंकर का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। जिस नौकरी के लिए 60 हजार रुपये प्रतिमाह मिलने की बात कही गई थी, वहां उससे 30 हजार रुपये प्रतिमाह के एग्रीमेंट पर काम कराया गया। उसने 19 मई से एक कंपनी की हेचरी में काम शुरू किया। उमाशंकर ने आरोप लगाया कि कंपनी ने उसका पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया था और उससे प्रतिदिन करीब 12 घंटे काम कराया जाता था। उसका कहना है कि तबीयत खराब होने के बावजूद उस पर काम करने का दबाव बनाया जाता था। धीरे-धीरे उसके पास मौजूद पैसे खत्म हो गए और खाने की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया।
उमाशंकर के मुताबिक हालात इतने खराब हो गए थे कि एक समय उसे लगने लगा कि वह भारत वापस नहीं लौट पाएगा। पासपोर्ट कंपनी के पास होने और पैसे खत्म होने के कारण उसकी परेशानी लगातार बढ़ती गई। इसके बाद उसने भारत लौटने के लिए मदद मांगी। मामले की जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय और सेनेगल स्थित भारतीय दूतावास तक पहुंचने के बाद उसकी वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई। उमाशंकर के अनुसार कंपनी मालिक और उसे दूतावास बुलाया गया, जहां करीब चार घंटे तक पूरे मामले की जानकारी ली गई। इसके बाद कंपनी मालिक ने उसका पासपोर्ट वापस किया और भारत लौटने के लिए टिकट की व्यवस्था की गई।
उमाशंकर रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा और वहां से ट्रेन के जरिए मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हुआ। सोमवार देर शाम वह अपने गांव पहुंचा। घर लौटने के बाद उसने कहा कि सेनेगल में बिताए चार महीनों का अनुभव वह कभी नहीं भूल पाएगा और अब दोबारा विदेश जाकर काम नहीं करना चाहता। उमाशंकर ने अपनी वापसी में केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. राजभूषण चौधरी और बिहार सरकार के मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता की पहल का भी उल्लेख किया। फिलहाल चार महीने बाद उमाशंकर के सुरक्षित घर लौटने से परिवार में खुशी का माहौल है।
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