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दिल्ली: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। गुरुवार, 5 नवंबर को नाम वापसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद उनकी जीत का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। चुनाव मैदान में उनके अलावा कोई उम्मीदवार नहीं बचा था। ऐसे में इस सीट पर मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी और उन्हें निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया। मध्य प्रदेश विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने पुरी को निर्वाचन प्रमाणपत्र सौंपा। इस दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी मौजूद रहे। पार्टी ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया था।
इस उपचुनाव में हरदीप सिंह पुरी के अलावा दो अन्य लोगों ने भी पर्चे दाखिल किए थे। इनमें राजकुमार लोहानी और कांते सयन्ना शामिल थे। हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दोनों के दस्तावेजों में जरूरी शर्तें पूरी नहीं पाई गईं, जिसके चलते उनके पर्चे खारिज कर दिए गए।
रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश के अनुसार, कांते सयन्ना के नामांकन में निर्धारित संख्या में प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं थे। चुनाव नियमों के मुताबिक, उनके पर्चे के समर्थन में विधानसभा के कम से कम 10 निर्वाचित सदस्यों या कुल निर्वाचित सदस्यों के 10 प्रतिशत के हस्ताक्षर जरूरी थे। नियम के अनुसार, इन दोनों में जो संख्या कम होती है, उतने प्रस्तावकों का समर्थन होना चाहिए। वहीं, राजकुमार लोहानी का नामांकन फॉर्म-26 का शपथपत्र तय समय पर जमा नहीं करने के कारण रद्द किया गया। उन्हें यह दस्तावेज 2 नवंबर को दोपहर 3 बजे तक देना था, लेकिन निर्धारित समय में शपथपत्र जमा नहीं हो सका।
पुरी के नामांकन पर कांग्रेस ने भी उठाए थे सवाल
हरदीप सिंह पुरी ने 31 अक्टूबर को भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विधानसभा में अपना नामांकन दाखिल किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई मंत्री और पार्टी नेता मौजूद थे। नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को हुई थी। इससे पहले कांग्रेस नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर से पुरी के नामांकन पर कुछ आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के बाद इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और पुरी का नामांकन वैध पाया। इसके बाद वह चुनाव प्रक्रिया में बने रहे।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट
मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट से हरदीप सिंह पुरी चुने गए हैं। यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन ने 14 अक्टूबर को राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था, लेकिन इस्तीफे के चलते इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा। अब इसी सीट से हरदीप सिंह पुरी का चुना जाना राजनीतिक घटनाक्रम में चर्चा का विषय बना हुआ है।
भाजपा ने इस खाली सीट के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया। नामांकन जांच में उनके पर्चे को वैध पाए जाने और बाकी दोनों उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने के बाद मुकाबले की स्थिति बदल गई। 5 नवंबर को नाम वापस लेने की आखिरी समयसीमा भी खत्म हो गई, लेकिन कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं रहा। इसी के साथ पुरी का निर्विरोध निर्वाचन औपचारिक रूप से पूरा हो गया।
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