भारत

महालया का भव्य आयोजन, 100 साल पुरानी परंपरा में शामिल हुए हजारों लोग

jantaserishta.com
10 Oct 2026 4:03 PM IST
महालया का भव्य आयोजन, 100 साल पुरानी परंपरा में शामिल हुए हजारों लोग
x
महालया का धार्मिक महत्व.
जोरहाट: असम के जोरहाट में महालया के मौके पर शनिवार तड़के श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। सुबह होने से पहले ही गर अली इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे। मां दुर्गा के स्वागत के लिए निकाले गए धार्मिक जुलूस में हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस बार का आयोजन इसलिए भी खास रहा, क्योंकि तराजन पूजा सम्मिलनी अपनी परंपरा के 100 साल पूरे कर रही है।
सुबह-सुबह सड़कों पर जुटे श्रद्धालु
जोरहाट में महालया के अवसर पर सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गईं। गर अली इलाके में लोगों की भीड़ जुटने लगी और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। श्रद्धालु इस पारंपरिक आयोजन में शामिल होने के लिए पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।महालया को मां दुर्गा के आगमन से जोड़कर देखा जाता है। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन और देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है।
तराजन पूजा सम्मिलनी के 100 साल पूरे
इस साल के आयोजन का सबसे खास पहलू तराजन पूजा सम्मिलनी की शताब्दी रही। संस्था ने अपनी 100 साल पुरानी परंपरा को यादगार बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया।
सम्मिलनी के अध्यक्ष भूपेन बरुआ ने बताया कि जोरहाट में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। संस्था के लिए 100 वर्ष पूरे होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी अवसर पर महालया के कार्यक्रम को विशेष रूप दिया गया।
आयोजन की शुरुआत मंदिर से निकाली गई भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। करीब दो किलोमीटर की दूरी तय कर श्रद्धालु कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। इस दौरान लोगों में धार्मिक आस्था और उत्साह देखने को मिला। आयोजन में संस्था की पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई दी।
महालया का धार्मिक महत्व
स्थानीय निवासी श्री श्री घोष ने बताया कि महालया पर बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ जुटना क्षेत्र में धार्मिक आस्था की गहराई को दिखाता है। इस दिन को मां दुर्गा के धरती पर आगमन की तैयारी के रूप में देखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महालया के साथ पितरों को समर्पित पक्ष समाप्त होता है और देवी पक्ष शुरू होता है। पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसके बाद मां दुर्गा की पूजा और दुर्गा उत्सव की तैयारियां जोर पकड़ने लगती हैं।
दुर्गा पूजा की तैयारियों को मिला उत्साह
महालया का त्योहार दुर्गा पूजा से पहले आने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। इसके बाद पूजा समितियां पंडालों, धार्मिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों की तैयारियों में तेजी लाती हैं।
जोरहाट में तराजन पूजा सम्मिलनी के शताब्दी वर्ष ने इस आयोजन को और खास बना दिया। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने पुरानी परंपरा के प्रति लोगों के जुड़ाव को दिखाया। यह आयोजन धार्मिक विश्वास के साथ सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की भी झलक पेश करता है।
जोरहाट में महालया का यह समारोह एक बार फिर दिखाता है कि वर्षों पुरानी परंपराएं आज भी लोगों को एक साथ जोड़ती हैं। मां दुर्गा के स्वागत के उत्साह और संस्था के 100 साल पूरे होने की खुशी ने इस बार के आयोजन को यादगार बना दिया।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story