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नई दिल्ली (आईएएनएस)| दिल्ली भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने बुधवार को एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि केजरीवाल सरकार ने एफबीयू को एक करोड़ रुपये का स्थापना फंड दिया और इसे सीक्रेट सर्विस फंड का नाम दिया गया। भाजपा ने कहा, आखिर केजरीवाल को किसकी जांच करवानी थी जिसके लिए गुप्त फंड बनाया गया। करोड़ों का फंड प्राइवेट जांच ऐजेंसियों को दिया गया, साथ ही मुखबिर खड़े करने के लिए भी किया गया। एफबीयू घोटाले पर बर्बाद हुए सरकारी फंड की रिकवरी अरविंद केजरीवाल से ही होनी चाहिए। साथ ही केजरीवाल पर जासूसी करने का आरोप लगाया है.
आगे वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार 2015 में अपनी स्थापना से आराजकता से काम करती रही है। और राजनीतिक विरोधियों के प्रति दूतिष भाव से काम करती है। उनके दमन में विश्वास करती है। इसी उद्देश्य से 1 फरवरी 2016 को केजरीवाल सरकार ने एफबीयू (फीड बैक यूनिट) की स्थापना राजनीतिक विरोधियों, केन्द्रीय मंत्रियों, सांसदों, उपराज्यपाल कार्यालय, मीडिया हाउसों, प्रमुख व्यापारियों सहित न्यायाधीशों तक पर नजर रखने के लिए की।
सचदेवा ने कहा कि अपनी अराजक परिपाटी के चलते केजरीवाल सरकार ने एफबीयू की स्थापना भी बिना प्रशासनिक एवं आर्थिक स्वीकृति केवल अपने कैबिनेट की स्वीकृति के आधार पर कर दी। जिसमे बिहार पुलिस से लाये गये 17 पुलिस एवं अन्य कर्मी रखे गये। इनका मुखिया एक सेवानिवृत्त सीआईएसएफ का डीआईजी बनाया गया जिनसे वरिष्ठ एक दर्जन अधिकारी एसीबी एवं सतर्कता विभाग मे उपलब्ध थे।
सचदेवा ने कहा कि शुरू से ही दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग ने इस पर आपत्ति की, पर सितम्बर 2016 में जब अश्वनी कुमार सतर्कता निदेशक बने तो उन्होने एफबीयू से काम का लेखा जोखा मांगा, पर वह अपने काम की कोई रिपोर्ट नही दे पायी। उसी बीच अगस्त 2015 में दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश आ गया कि दिल्ली के सभी मामलों में उपराज्यपाल सर्वोच्च होंगे, तब केजरीवाल सरकार को एफ.बी.यू. स्थापना की फाइल तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग को भेजनी पड़ी, जिन्होने सतर्कता विभाग के रहते ऐसी नई संस्था बनाने पर आपत्ति करते हुऐ ना सिर्फ फाइल रिजेक्ट कर दी बल्कि सीबीआई जांच के भी आदेश दिये।
सचदेवा ने कहा है की आज दिल्ली की जनता केजरीवाल सरकार से इस एफबीयू स्थापना को लेकर कुछ सवाल पूछना चाहती है और सरकार जवाबदेह है : एसीबी एवं सतर्कता विभाग के होते हुऐ भी आखिर केजरीवाल सरकार ने आखिर सेवानिवृत्त लोगों को लेकर एफबीयू की स्थापना क्यों की थी?
बीजेपी ने कहा, हमारे हिसाब से मकसद राजनीतिक विरोधियों पर नजर रखना था, जैसा सीबीआई रिपोर्ट से भी साफ है कि इनकी 60 प्रतिशत रिपोर्ट केवल राजनीतिक थी।
सीबीआई जांच मे सामने आया कि एफ.बी.यू. ने केजरीवाल सरकार को लगभग 700 रिपोर्ट दीं, मुख्य मंत्री बताएं, उन पर क्या कारवाई हुई?
अंत में सचदेवा ने कहा है की एफबीयू मामले में सीबीआई ने उपराज्यपाल से सरकार के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी है। और दिल्ली भाजपा उपराज्यपाल से अविलंब इस संदर्भ में सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति देंने का निवेदन करती है। आगे सचदेवा ने कहा कि साथ ही हम मांग करते हैं कि विज्ञापन घोटाले की ही तरह एफबीयू घोटाले पर बर्बाद हुए सरकारी फंड की रिकवरी भी अरविंद केजरीवाल से व्यक्तिगत तौर पर हो।
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