
भारत के साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में एक बड़ी तकनीकी प्रगति के तहत TraceX Labs ने GEOX AI नामक एक उन्नत AI-powered geospatial intelligence प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार यह सिस्टम फोटो और वीडियो के अंदर मौजूद विजुअल क्लूज़ का विश्लेषण करके उनकी वास्तविक लोकेशन का पता लगा सकता है, वह भी बिना GPS metadata या hidden location tags के।
आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड की गई इमेज और वीडियो से metadata हटा दिया जाता है, जिससे पारंपरिक geolocation methods कमजोर पड़ जाते हैं। लेकिन GEOX AI सड़क संरचना, पहाड़, पेड़-पौधे, मौसम, इमारतों की बनावट, shadows और regional visual patterns जैसे संकेतों का विश्लेषण करके संभावित लोकेशन का अनुमान लगाता है।
TraceX Labs के मुताबिक GEOX AI में artificial intelligence, machine learning, computer vision और environmental intelligence analysis जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। यह प्लेटफॉर्म OSINT investigations, cybersecurity operations, digital forensics, military intelligence और media verification जैसे क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है।
इस सिस्टम में Fast Mode और Advanced Mode नाम के दो ऑपरेशन मोड दिए गए हैं। Fast Mode सोशल मीडिया verification और त्वरित जांच के लिए बनाया गया है, जबकि Advanced Mode blurred या low-context visuals पर deep forensic-level analysis करने में सक्षम है।
कंपनी का कहना है कि भविष्य में AI-powered geospatial intelligence तकनीक misinformation verification, cyber threat investigations, drone intelligence analysis और national security operations में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार आम सोशल मीडिया यूज़र्स को भी ऑनलाइन फोटो साझा करते समय अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि GPS metadata हटाने के बाद भी AI सिस्टम visual clues के आधार पर लोकेशन की पहचान कर सकते हैं।





