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फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश, 9 आरोपी

SHIDDHANT
8 Oct 2026 9:31 PM IST
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश, 9 आरोपी
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Delhi दिल्ली: दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ ने दिव्यांगों (पीडब्ल्यूडी) के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनाने और उन्हें उपलब्ध कराने वाले एक बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कथित तौर पर कॉलेजों और अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लेने के लिए किया जाता था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस रैकेट के सिलसिले में नौ लोगों को पकड़ा गया है और 27 नकली विकलांगता प्रमाण पत्र बरामद किए गए हैं। आरोप है कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश में अलग-अलग मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालयों के कर्मचारियों की मिलीभगत से यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) रिकॉर्ड में हेरफेर करता था और नकली मेडिकल रिपोर्ट व विकलांगता प्रमाण पत्र तैयार करता था।
पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश में नकली पते दिखाने के लिए आधार कार्ड की जानकारी बदलने में एआई-आधारित टूल का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद यह डेटा बिचौलियों को नकली मेडिकल रिपोर्ट और पीडब्ल्यूडी (विकलांग व्यक्ति) प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए दिया जाता था। यह मामला 31 अगस्त को सामने आया, जब उत्तरी जिले के स्पेशल स्टाफ के इंचार्ज इंस्पेक्टर रोहित सारस्वत को जानकारी मिली कि यूपी के अलीगढ़ का रहने वाला ललित कुमार, पैसे के बदले नकली पीडब्ल्यूडी प्रमाण पत्र बनवाकर जेबीटी, बीटेक, दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य शैक्षणिक कोर्स में दाखिला दिलाने का काम कर रहा था।
जांच के बाद इंस्पेक्टर सारस्वत की अगुवाई और एसीबी/ऑपरेशन्स विशेष धत्तरवाल की देखरेख में एक रेडिंग टीम ने हरियाणा के फरीदाबाद में रह रहे 36 वर्षीय ललित कुमार उर्फ ​​आदित्य को पकड़ा। पुलिस ने बताया कि उसके पास से बदायूं, बरेली और सिद्धार्थ नगर के सरकारी अस्पतालों द्वारा जारी 16 पीडब्ल्यूडी प्रमाण पत्र बरामद किए गए। ये प्रमाण पत्र सुनने की अक्षमता, चलने-फिरने में अक्षमता और कम दृष्टि से संबंधित थे और कथित तौर पर पीडब्ल्यूडी श्रेणी के तहत दाखिला पाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा था। तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी बरामद किया गया।
इसके बाद मॉरिस नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पूछताछ के दौरान, ललित कुमार ने कथित तौर पर बताया कि वह नकली पीडब्ल्यूडी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए छात्रों का निजी डेटा हासिल करने के लिए नोएडा स्थित शिक्षा सलाहकार रोशन मिश्रा और अन्य सलाहकारों के साथ काम करता था।
पुलिस ने बताया कि सिद्धार्थ नगर, बदायूं, बरेली और गोरखपुर जैसे जिलों के पते दिखाने के लिए एआई टूल का इस्तेमाल करके आधार पते बदले गए थे। आरोपियों ने इन जानकारियों का इस्तेमाल यूडीआईडी पोर्टल के जरिए विकलांगता प्रमाण-पत्रों के लिए आवेदन करने में किया। इसके बाद अलग-अलग जिलों में अपने साथियों के जरिए हर प्रमाण-पत्र के लिए 20,000 से 30,000 रुपए लेकर ये प्रमाण-पत्र बनवाए गए।
नोएडा के सेक्टर 18 में 'रुद्र कंसल्टेंसी' चलाने वाले रोशन कुमार को 1 सितंबर को पकड़ा गया। पुलिस का आरोप है कि उसने ग्रेजुएशन और बीटेक कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्रों के आधार कार्ड की जानकारी, फोटो और हस्ताक्षर इकट्ठा किए और यह जानकारी ललित कुमार के साथ शेयर की। आरोप है कि उसने छात्रों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर आए ओटीपी उपलब्ध कराकर आवेदन करने में भी मदद की।
बरेली में सीएओ ऑफिस में यूडीआईडी पोर्टल पर कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले 28 वर्षीय कुलदीप को 3 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि उसके मोबाइल फोन में विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाने से जुड़ी चैट और डॉक्यूमेंट्स मिले। फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने में इस्तेमाल किया गया एक डेस्कटॉप कंप्यूटर भी जब्त किया गया।
कुलदीप की निशानदेही पर शेर सिंह सोलंकी और बरेली विकलांगता बोर्ड के सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत सक्सेना को पकड़ा गया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बीच पैसों के लेन-देन का भी पता चला।
सिद्धार्थ नगर में सीएमओ ऑफिस में तैनात सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर जयप्रकाश शुक्ला को तकनीकी जांच और बैंक ट्रांजैक्शन की पड़ताल के बाद 10 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि उसने पैसे लेकर सिद्धार्थ नगर के पते का इस्तेमाल करते हुए विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाने और उन्हें मंजूरी दिलाने में अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।
सुरेंद्र रस्तोगी, जिसके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल इन लेन-देन के लिए किया गया था, उसे बाद में 19 सितंबर को पकड़ा गया।
12 सितंबर को सीतापुर से आदेश सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि वह गोरखपुर और देवरिया के पते वाले फर्जी विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाने में ललित कुमार के साथ शामिल था। लखनऊ में उसके घर से नौ विकलांगता प्रमाण-पत्र बरामद किए गए।
18 सितंबर को देवरिया में सीएमओ ऑफिस में तैनात जूनियर असिस्टेंट धीरेंद्र कुमार पांडे को भी पकड़ा गया। पुलिस का आरोप है कि वह विकलांगता के नकली सर्टिफिकेट तैयार करने में शामिल था और हर सर्टिफिकेट के लिए 5,000 रुपए नकद लेकर उन्हें चंदन सिंह यादव को देता था। पुलिस ने बताया कि जब गोरखपुर में तलाशी ली गई, तो चंदन फरार था। वहीं, पुलिस की ओर से आगे की जांच चल रही है।
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