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Delhi दिल्ली। अमेरिका समेत कई देशों में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच जी-7 देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने पर सहमति जताई है। यह प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी और चार महीने में पूरी की जाएगी। शुरुआती 20 दिनों में डीजल की बड़ी मात्रा बाजार में उतारने की योजना है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। शुक्रवार को अमेरिका में डीजल की औसत कीमत करीब 6.37 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई। बढ़ती ईंधन लागत को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी पर 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव भी बढ़ा है।
जी-7 नेताओं की बैठक में ऊर्जा बाजार की स्थिति पर चर्चा के बाद भंडार जारी करने का फैसला लिया गया। संयुक्त बयान के मुताबिक, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के माध्यम से 10 करोड़ बैरल की समन्वित रिलीज की जाएगी। डीजल की उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त डीजल जारी करने की संभावना पर भी आगे चर्चा की जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यूरोप अपने भंडार से बड़ी मात्रा में डीजल जारी करने पर सहमत हुआ है और इसकी प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी। दूसरी तरफ जी-7 देशों ने आपसी ऊर्जा व्यापार पर निर्यात प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
ईंधन बाजार पर रूस और मध्य पूर्व से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं का भी असर पड़ा है। खासकर डीजल की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ने के बाद अमेरिका में इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर चर्चा हुई थी। यूरोपीय देशों के लिए ऐसी पाबंदी मुश्किलें बढ़ा सकती थी, क्योंकि वे अपनी जरूरत का एक हिस्सा आयात से पूरा करते हैं। जी-7 के फैसले का उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराकर कीमतों पर दबाव कम करना है। हालांकि 10 करोड़ बैरल की रिलीज चार महीने में होगी और ऊर्जा बाजार की आगे की स्थिति के आधार पर अतिरिक्त कदमों पर विचार किया जा सकता है।
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