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राजीव गांधी से पहली मुलाकात से लेकर PM पद ठुकराने तक, सोनिया की किताब में क्या-क्या होगा?

SHIDDHANT
27 Oct 2026 9:28 PM IST
राजीव गांधी से पहली मुलाकात से लेकर PM पद ठुकराने तक, सोनिया की किताब में क्या-क्या होगा?
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दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने अपनी आगामी किताब को लेकर कहा कि दशकों से दूसरे लोग उनकी कहानी बताते रहे हैं, लेकिन अब वह खुद अपनी बात दुनिया के सामने रखेंगी। उन्होंने किताब आने पर कुछ ‘तमाशा’ होने की बात भी कही। उनका संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को रिलीज होगा। सोनिया गांधी ने मंगलवार को X पर अपनी किताब का नया वीडियो साझा किया। इसमें वह किताब के पन्ने पलटते हुए अपने जीवन की कहानी खुद बताने की बात करती नजर आईं। पिछले सप्ताह X से जुड़ने के बाद यह उनकी दूसरी पोस्ट है। इससे पहले उन्होंने अपनी आने वाली किताब का वीडियो साझा कर सोशल मीडिया पर शुरुआत की थी। इस संस्मरण में सोनिया गांधी ने अपनी निजी जिंदगी, राजीव गांधी के साथ प्रेम संबंध, भारत आने के अनुभव, नेहरू-गांधी परिवार में अपने शुरुआती दिनों और राजनीति में प्रवेश से जुड़े कई प्रसंग साझा किए हैं।
कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से हुई थी पहली मुलाकात
सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण में राजीव गांधी के साथ पहली मुलाकात और प्रेम कहानी का जिक्र किया है। 1970 के दशक में इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान दोनों मिले थे। एक ग्रीक रेस्टोरेंट में हुई मुलाकात से शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और बाद में दोनों ने शादी कर ली। सोनिया के मुताबिक, पहली मुलाकात में ही राजीव उन्हें पसंद आ गए थे। उन्हें लगा था कि राजीव ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह अपनी जिंदगी बिताना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव भी उनके बारे में ऐसा ही महसूस करते थे। सोनिया गांधी ने राजीव गांधी के सौम्य स्वभाव और सहज व्यवहार की तारीफ की। उन्होंने बताया कि राजीव का व्यक्तित्व पहली मुलाकात में ही लोगों को प्रभावित करता था। पार्टियों, घूमने-फिरने और छात्रों की बैठकों में साथ समय बिताने के दौरान दोनों की दोस्ती गहरी हुई, जो आगे चलकर प्यार और शादी में बदल गई।
राजीव गांधी से शादी के बाद सोनिया गांधी को नए परिवार और भारतीय संस्कृति के अनुरूप खुद को ढालना पड़ा। अपने संस्मरण में उन्होंने सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात के अनुभव भी साझा किए हैं। उनकी किताब में गांधी परिवार के साथ शुरुआती जीवन और निजी रिश्तों से जुड़े कई पहलुओं का जिक्र है। भारत आने के बाद भाषा, खानपान और रहन-सहन के तौर-तरीकों को समझना उनके जीवन का अहम हिस्सा बना। सोनिया ने हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय जीवनशैली अपनाने जैसे अनुभवों को भी अपने संस्मरण में शामिल किया है। यह दौर उनके लिए एक नए देश, नए परिवार और नई सामाजिक परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने का समय था।
इंदिरा और राजीव गांधी की हत्या ने बदल दी जिंदगी
सोनिया गांधी की जिंदगी में 1984 और 1991 की घटनाओं ने गहरा प्रभाव डाला। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, लेकिन 1991 में एक चुनावी रैली के दौरान उनकी भी हत्या कर दी गई। अपनों को खोने के इस दर्द ने सोनिया गांधी की जिंदगी बदल दी। निजी जीवन पसंद करने वाली सोनिया धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन और राजनीति की ओर बढ़ीं।
राजनीति से दूरी के बाद कांग्रेस की कमान संभाली
राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने तुरंत राजनीति में प्रवेश नहीं किया। उस दौरान पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। अगले वर्षों में कांग्रेस के भीतर गुटबाजी बढ़ी और पार्टी को कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बाद में सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली और पार्टी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1997 में सोनिया गांधी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली। इसके बाद 1998 में उन्होंने पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वह 2017 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। उनका कार्यकाल पार्टी के इतिहास में सबसे लंबे अध्यक्षीय कार्यकालों में शामिल है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से संभालने और राष्ट्रीय राजनीति में उसकी भूमिका बनाए रखने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकराया
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी UPA को सरकार बनाने का अवसर मिला। चुनाव के बाद सहयोगी दलों के समर्थन से गठबंधन ने सरकार बनाने की स्थिति हासिल की। कई सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया था। सोनिया गांधी ने 18 मई 2004 को प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद संभाला और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले UPA गठबंधन की सरकार का नेतृत्व किया।
सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर उस समय देश में बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था। उनके प्रधानमंत्री न बनने के फैसले पर भी काफी चर्चा हुई। बाद में सोनिया गांधी ने UPA अध्यक्ष के रूप में गठबंधन की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कांग्रेस के नेतृत्व को मजबूती देने में अहम योगदान दिया। अब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ के जरिए सोनिया गांधी अपने जीवन के निजी और राजनीतिक अनुभवों को पाठकों के सामने रखने जा रही हैं। किताब के 10 नवंबर को रिलीज होने से पहले ही उनके बयान और साझा किए गए वीडियो ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।
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