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हस्तशिल्प से लेकर पर्यटन तक जीएसटी सुधार से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

jantaserishta.com
4 Oct 2025 1:33 PM IST
हस्तशिल्प से लेकर पर्यटन तक जीएसटी सुधार से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
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नई दिल्ली: एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में हस्तशिल्प, कृषि, पर्यटन और स्थानीय विशिष्टताओं में जीएसटी रेट को 5 प्रतिशत करने से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, लागत कम हो रही है और बाजारों का विस्तार हो रहा है।
जीएसटी सुधार कारीगरों और किसानों की आजीविका को मजबूत कर रहे हैं, निर्यात को प्रोत्साहित कर रहे हैं और रोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे क्षेत्र की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए सस्टेनेबल ग्रोथ सुनिश्चित हो रही है।
जीआई-टैग पश्मीना शॉल, डोगरा पनीर और बसोहली पेंटिंग जैसे कई विरासत उत्पाद अब सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करते हुए घरेलू और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। दस्तावेज में बताया गया है कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र कारीगरों और हाशिए पर रहने वाले श्रमिकों सहित 3.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लोगों को रोजगार देता है। साथ ही, इन रोजगारों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत है।
कश्मीर घाटी में, विशेष रूप से कनिहामा में, लगभग 5,000 बुनकर जीआई-टैग वाली बेहतरीन पश्मीना शॉल बनाते हैं। जीएसटी रेट में 12 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक की कटौती इन शॉल को अधिक किफायती बनाती है, जिससे आजीविका की सुरक्षा और कश्मीर की प्रतिष्ठित विरासत को संरक्षित करते हुए मशीन-निर्मित नकल के खिलाफ मांग, निर्यात और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है।
कठुआ जिले के बसोहली में निर्मित जीआई-टैग वाली बसोहली पेंटिंग में लगभग 500 स्थानीय कलाकार काम करते हैं। जीएसटी सुधार के साथ ये पेंटिंग अधिक सस्ती और मार्केटिंग योग्य हो जाएंगी, जिसके साथ कारीगरों की आजीविका को समर्थन मिलेगा।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, कुपवाड़ा, कुलगाम और बडगाम में अखरोट की खेती एक महत्वपूर्ण आर्थिक भूमिका निभाती है, जो सालाना आधार पर लगभग 120 करोड़ रुपए का व्यापार पैदा करती है और लगभग 10,000 लोगों को रोजगार प्रदान करती है। जीएसटी रेट को 5 प्रतिशत करने से कश्मीरी अखरोट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अधिक किफायती और प्रतिस्पर्धी हो गए हैं, जिससे किसानों के लिए उच्च मांग और बेहतर कीमतों को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
भारत के बादाम उत्पादन में जम्मू-कश्मीर की हिस्सेदारी 91 प्रतिशत से अधिक है। अकेले यह क्षेत्र लगभग 5,500 लोगों को रोजगार प्रदान करता है। कश्मीरी बादाम पैकेजिंग उद्योग को इस जीएसटी सुधार से लाभ मिल रहा है।
जम्मू के प्रसिद्ध मंदिरों से लेकर कश्मीर घाटी की झीलों और बागों तक, जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता इसे विश्व स्तर पर एक शीर्ष पर्यटन स्थल बनाती है। वर्ष 2023 के दौरान पर्यटकों का आगमन 2.1 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024 में 2.3 करोड़ हो गया है। क्षेत्र 70,000 से अधिक रोजगारों का समर्थन करता है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15 प्रतिशत का योगदान देता है।
पर्यटन और होटल टैरिफ पर जीएसटी सुधार के साथ 7,500 रुपए तक स्टे के लिए यात्रा पहले के मुकाबले अधिक किफायती होगी, ऑक्यूपेंसी को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय तक स्टे को प्रोत्साहन मिलेगा। यह स्थानीय व्यवसायों के लिए राजस्व बढ़ाएगा और इस क्षेत्र में रोजगार को मजबूत करेगा।
उधमपुर जिले की विशेषता और जीआई-टैग वाला उत्पाद डोगरा पनीर है। जीएसटी सुधार के साथ स्थानीय डेयरी उत्पादकों और छोटे पैमाने पर पनीर निर्माताओं को कम उत्पादन लागत, बेहतर लाभ मार्जिन और घरेलू और विशिष्ट निर्यात बाजारों दोनों में बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा क्षमता से लाभ होगा।
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