सावित्रीबाई फुले के बताये रास्ते पर चलकर महिलाओं की मुक्ति सौभव- डॉ ओम सुधा

नई दिल्ली: सावित्रीबाई फुले ने देश में महिलाओं के लिये पहला स्कूल खोला। उस समय सावित्रीबाई फुले दो साङी लेकर स्कूल जाती थी क्योंकि उस समय रास्ते में उनके उपर गोबर फेंका जाता था। आज भी महिलाओं की स्थिति में बहुत बदलाव नहीं हुआ है। पुरूषवादी समाज महिलाओं को शिक्षा से दूर रखना चाहता है। आज की तारीख में भी समतामूलक समाज के निर्माण के लिये सावित्रीबाई फुले के विचार प्रासांगिक भी हैं। उक्त बातें अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ ओम सुधा ने कोक प्लांट लोयाबाद में आयोजित सावित्रीबाई फुले जयंती समारोह में कही। मौके पर बोलते हुए परिसंघ (महिला विंग) की राष्ट्रीय सचिव गुङिया देवी ने कहा कि हमारा संगठन सावित्रीबाई फुले के विचारों जन जन तक पहुंचाने के लिये प्रतिबद्ध है। जिस तरह सावित्रीबाई फुले को मुश्किलों का सामना करना पङा था उसी तरह आज की महिलाओं को भी शिक्षा से दूर करने की साज़िश जारी है । इस मौके पर वीरेन्द्र पासवान, प्रदेश अध्यक्ष (आईटी सेल) छोटन राम , जिला महासचिव, अक्षय कुमार, NSYF एवं शंकर पासवान ने भी संबोधित किया ।
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