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96 लाख की ठगी, 5 आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़े...डिजिटल अरेस्ट का मामला
jantaserishta.com
9 Jan 2026 5:45 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस यूनिट ने एक संगठित डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए दो प्राइवेट बैंक कर्मचारियों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन लोगों ने 80 साल के बुजुर्ग से करीब 96 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है. आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन और केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर बुजुर्ग पीड़ित से संपर्क किया था.
पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में टेलीकॉम और जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर व्हाट्सएप के जरिए पीड़ित से बात की गई. उनको बताया गया कि उनका मोबाइल नंबर और आधार से जुड़ी जानकारी अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रही है. आरोपियों ने बुजुर्ग और उनकी पत्नी को सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा. इस दौरान उन्हें लगातार डराया गया. उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई.
इसी दबाव में पीड़ित को फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पहले तुड़वाने, अपनी पूरी बचत ट्रांसफर करने और यहां तक कि गोल्ड लोन लेने के लिए मजबूर किया गया. ठगों ने भरोसा दिलाया था कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी. लेकिन जांच में सामने आया कि गिरोह ने इस तरीके से बुजुर्ग से कुल 96 लाख रुपए की ठगी की है. इस मामले में 4 नवंबर को ई-FIR दर्ज की गई थी.
पुलिस की जांच के दौरान बैंक खातों के विवरण, डिजिटल फुटप्रिंट और तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया गया. इसी कड़ी में पहले आरोपी प्रदीप कुमार को हरियाणा के हिसार से गिरफ्तार किया गया. उसके बाद हिसार से ही नमनदीप मलिक को पकड़ा गया. पुलिस ने तीसरे आरोपी शशिकांत पट्टनायक को ओडिशा के भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि वो अहम भूमिका निभा रहा था.
इसमें लाभार्थी खातों का संचालन, फर्जी GST रजिस्ट्रेशन और ठगी के पैसे को कई खातों के जरिए छिपाना शामिल था. आगे की जांच में खुलासा हुआ कि दिल्ली की एक प्राइवेट बैंक ब्रांच के दो कर्मचारी, सीनियर सेल्स मैनेजर नीलेश कुमार और सेल्स ऑफिसर चंदन कुमार भी इस रैकेट में शामिल थे. आरोप है कि दोनों ने जाली दस्तावेजों के जरिए एक फर्जी करंट अकाउंट खुलवाया था.
इसका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से आए पैसे निकालने और हड़पने में किया गया. पुलिस का कहना है कि पूरे मनी ट्रेल को खंगाला जा रहा है. इस रैकेट से जुड़े अन्य साजिशकर्ताओं और मददगारों की पहचान के लिए जांच जारी है. गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है. इसमें ज्यादातर बुजुर्ग लोग निशाने पर रहे हैं.
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