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पालक परिवार योजना: वंचित बच्चों के लिए जींद में उम्मीद की नई किरण
Shantanu Roy
23 July 2025 5:57 PM IST

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Jind. जींद। बचपन किसी भी व्यक्ति के जीवन की नींव होता है, लेकिन यदि किसी बच्चे को वह आधार ही न मिले तो उसका सम्पूर्ण भविष्य प्रभावित हो सकता है। हरियाणा के जींद जिले में इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से फोस्टर केयर योजना प्रभावी रूप से चलाई जा रही है। इस योजना के जरिए उन बच्चों को परिवार जैसा वातवरण देने का प्रयास किया जा रहा है, जिनके अपने माता-पिता उन्हें उचित देखभाल नहीं दे पा रहे हैं।
बुधवार को जिला कार्यक्रम अधिकारी सीमा रोहिल्ला ने योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फोस्टर केयर यानी पालक परिवार व्यवस्था के तहत ऐसे बच्चों को चयनित किया जाता है जिनके माता-पिता या तो जीवित नहीं हैं, या वे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, या जेल में हैं, अथवा जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे बच्चों का पालन-पोषण नहीं कर सकते। इसके अतिरिक्त उन बच्चों को भी इस योजना में शामिल किया जाता है।
जो किसी बाल देखभाल संस्था में हैं। जिन्हें गोद नहीं लिया गया है। सीमा रोहिल्ला के अनुसार, फोस्टर केयर योजना के अंतर्गत बच्चों को पालक परिवारों के साथ तीन वर्षों तक रखा जा सकता है। इस अवधि के दौरान पालक परिवार को राज्य सरकार द्वारा प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि वे उस बच्चे की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें। इस सहायता के साथ-साथ सरकारी एजेंसियां समय-समय पर फॉलोअप और निगरानी भी करती हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चा एक सुरक्षित और स्नेहपूर्ण वातावरण में है।
योजना के अंतर्गत योग्य पालक परिवारों की पहचान बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा की जाती है। चयन के बाद बच्चों को उन परिवारों को सौंपा जाता है जो सभी तय मापदंडों को पूरा करते हैं। इन मापदंडों में यह शामिल है कि दंपती भारतीय नागरिक हों, उनकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो, वे मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हों, बच्चे की देखभाल करने में सक्षम हों और उनके विरुद्ध किसी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज न हो। साथ ही पालक दंपती को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे समय-समय पर होने वाली फॉलोअप बैठकों में भाग लें और रिपोर्टिंग प्रक्रिया में सहयोग करें।
सहानुभूति और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा
फोस्टर केयर योजना केवल बच्चों के जीवन को सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में मानवीय संवेदनाओं और सहानुभूति की भावना को भी मजबूत करती है। इससे न केवल बच्चे को एक सुरक्षित आश्रय मिलता है, बल्कि पालक परिवारों को भी सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का अवसर प्राप्त होता है। जींद के उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा ने इस योजना को समाज के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इच्छुक पालक दंपती जिला बाल संरक्षण इकाई या महिला एवं बाल विकास विभाग, जींद से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करना है, ताकि वे भी समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
समाज में जागरूकता की आवश्यकता
हालांकि योजना की संभावनाएं बहुत व्यापक हैं, लेकिन इसके लिए समाज में व्यापक जागरूकता की भी आवश्यकता है। अभी भी बहुत से लोग इस योजना की जानकारी से अनभिज्ञ हैं। जिला प्रशासन की ओर से इस दिशा में अभियान चलाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक परिवार इसके लिए आगे आएं और समाज में सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बनें।
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