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पूर्व मंत्री का निधन, नहीं रहे प्रो. नलिनी रंजन सिंह

jantaserishta.com
8 Jan 2022 5:12 PM GMT
पूर्व मंत्री का निधन, नहीं रहे प्रो. नलिनी रंजन सिंह
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कांटी: पूर्व मंत्री व कांटी विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. नलिनी रंजन सिंह (86 वर्ष) का जमशेदपुर के बिस्टुपुर में शनिवार सुबह छह बजे निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही कांटी समेत जिले के नेताओं व लोगों ने शोक जताया। उनकी इच्छा के अनुसार जमशेदपुर में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी पुत्री सुमिता नूपुर ने उन्हें मुखाग्नि दी।

सुमिता ने बताया कि कुछ दिन पहले गिर जाने के उन्हें बोन फ्रैक्चर हुआ था। इसके बाद परेशानी बढ़ती चली गई। सांस की तकलीफ बढ़ने पर उन्हें दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट व वेंटिलेटर पर भी रखा गया। सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अक्सर जमशेदपुर में बेटी सुमिता व दामाद उत्तम कुमार के साथ रहते थे। नलिनी बाबू का कहना था कि मेरी नजर में बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है। तुम ही मेरा दाह संस्कार करना। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए सुमिता ने मुखाग्नि दी। नलिनी बाबू की इच्छा के अनुसार आर्य समाज विधि से उनका श्राद्ध कर्म जमशेदपुर में ही होगा। कोविड के कारण बाद में मुजफ्फरपुर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा।
नलिनी बाबू का जन्म छह जुलाई 1937 को सीतामढ़ी के रीगा में हुआ था। बीएचयू बनारस व यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में उन्होंने पढ़ाई की। बिहार विश्वविद्यालय में उन्होंने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर व एलएलबी की। वर्ष 1961 से 1997 तक वह बिहार विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफेसर व हेड रहे। आरडीएस कॉलेज में प्राध्यापक के रूप में भी सेवा दी। जमींदार परिवार के होने के बाद भी कम्युनिस्ट विचारधारा की पार्टी एसयूसीआई से जुड़कर आम जनता के लिए संघर्ष किया। वर्ष 1977 में पहली बार वे ठाकुर प्रसाद सिंह से चुनाव हार गए थे। लेकिन, अपने संघर्ष व जमीनी पकड़ की बदौलत एसयूसीआई के एकमात्र विधायक के रूप में 1980 में पहली बार चुने गए। इसके बाद 1985 में कद्दावर नेत्री तारकेश्वरी सिन्हा को हराया।
वहीं, 1990 में जनता दल के टिकट पर कांटी विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। इस बीच लालू प्रसाद यादव की सरकार में भवन निर्माण विभाग के मंत्री बने। विदेश में सड़क हादसे में अपनी पत्नी व पुत्र को खोने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आईटीआई, कंप्यूटर शिक्षण समेत शिक्षा संस्थान के माध्यम से सामाजिक योगदान दिया।
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