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नहीं रहे पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर शिवराज पाटिल

jantaserishta.com
12 Dec 2025 8:15 AM IST
नहीं रहे पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर शिवराज पाटिल
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लातूर: कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का आज लातूर में 90 साल की उम्र में निधन हो गया. पाटिल ने सुबह करीब 6:30 बजे लातूर में अपने घर पर आखिरी सांस ली, जहां वे लंबी बीमारी के कारण घर पर ही देखरेख में थे. शिवराज पाटिल ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई अहम पद संभाला, जिसमें लोकसभा स्पीकर और केंद्रीय कैबिनेट में कई अहम पद शामिल हैं. पाटिल ने लातूर लोकसभा सीट से सात बार जीत हासिल की.

यादों के झरोखों से, शिवराज पाटिल के साथ प्रबंध संपादक पप्पू फरिश्ता अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में

साल 2003 - 2004 में अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल के साथ प्रबंध संपादक पप्पू फरिश्ता मिले थे। पुरानी यादें ताज़ा करने प्रबंध संपादक पप्पू फरिश्ता ने उस एतिहासिक पल की तस्वीरें अपने दफ्तर में फ्रेम पर संजोकर रखे है। कार्यक्रम में पूर्व सीएम अमर सिंह चौधरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री उर्मिलाबेन पटेल भी मौजूद थे।

उनके गुजर जाने के बाद पूरे महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में शोक का माहौल है, क्योंकि पाटिल को भारतीय राजनीति में एक शांत, संयत और बेहद मेहनती नेता के तौर पर जाना जाता था.

शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को लातूर जिले के चाकुर में हुआ था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले आयुर्वेद का अभ्यास किया और फिर मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा ली. राजनीति में उनका सफर 1967 में शुरू हुआ, जब उन्होंने लातूर नगर पालिका में काम संभाला. यह शुरुआत आगे चलकर एक बड़े राजनीतिक करियर की नींव बनी.
1980 में वे पहली बार लातूर लोकसभा सीट से सांसद बने और उसके बाद लगातार सात बार इसी सीट से जीतकर संसद पहुंचे. यह उपलब्धि उन्हें महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में जगह दिलाती है. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में उन्होंने रक्षा, वाणिज्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण विभागों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाई.
1991 से 1996 तक वे लोकसभा के स्पीकर रहे. अपने कार्यकाल में उन्होंने लोकसभा के आधुनिकीकरण, कंप्यूटरीकरण, कार्यवाही के सीधा प्रसारण और नई लाइब्रेरी बिल्डिंग के निर्माण जैसे कामों को तेजी दी. यह समय भारतीय संसद के तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव का अहम दौर माना जाता है.
2004 में चुनाव हारने के बावजूद उन्हें केंद्र में गृह मंत्री बनाया गया. लेकिन 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया. बाद में उन्हें पंजाब का गवर्नर और चंडीगढ़ का प्रशासक बनाया गया, जहां उन्होंने 2010 से 2015 तक सेवा दी.
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