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विदेशी पर्यटकों को फिर मिलेगा भारत आने का मौका, 5 लाख को जारी किया जाएगा मुफ्त वीजा

Deepa Sahu
20 Sept 2021 12:25 AM IST
विदेशी पर्यटकों को फिर मिलेगा भारत आने का मौका, 5 लाख को जारी किया जाएगा मुफ्त वीजा
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देश में कोरोना वायरस के मामलों में कमी को देखते हुए डेढ़ साल में पहली बार भारत जल्दी ही विदेशी पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोल सकता है।

नई दिल्ली,देश में कोरोना वायरस के मामलों में कमी को देखते हुए डेढ़ साल में पहली बार भारत जल्दी ही विदेशी पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोल सकता है। कोरोना के चलते मार्च 2020 में लगाए गए राष्ट्रव्यापी लाकडाउन से बुरी तरह प्रभावित पर्यटन, आतिथ्य और विमानन क्षेत्रों में नई जान डालने की कवायद के तहत पहले पांच लाख विदेशी पर्यटकों को मुफ्त वीजा जारी किया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी विदेशी पर्यटकों को देश में आने देने के लिए संभावित तारीख और तौर-तरीकों पर सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि विदेशी पर्यटकों को भारत आने देने की अनुमति दिए जाने के संबंध में औपचारिक घोषणा अगले 10 दिनों के भीतर की जा सकती है। विदेशी पर्यटकों को आने देने का फैसला कोरोना के घटते मामलों को देखते हुए लिया जा रहा है। इसके अलावा देश में 80 करोड़ डोज से ज्यादा टीके भी लगाए जा चुके हैं।
मुफ्त वीजा 31 मार्च, 2022 या पांच लाख की संख्या पूरा होने तक जारी किए जाएंगे। उम्मीद है कि मुफ्त वीजा जारी करने से कम अवधि के ज्यादा पर्यटक भारत आएंगे। एक महीने तक के लिए जारी किया जाने वाला ई-पर्यटक वीजा देशों पर आधारित है, लेकिन आम तौर पर इसके लिए 25 डालर (लगभग 1800 रुपये) शुल्क लिया जाता है। एक साल के ई-पर्यटक वीजा के लिए अमूमन 40 डालर (लगभग तीन हजार रुपये) का शुल्क लिया जाता है। मार्च 2020 से ई-पर्यटक वीजा निलंबित है।
कोरोना के चलते पिछले साल 30 लाख से कम विदेशी पर्यटकों ने किया था भारत का दौरा
बता दें कि कोरोना महामारी को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के कारण पिछले साल 2020 में 30 लाख से कम विदेशी पर्यटकों ने भारत का दौरा किया था। इस दौरान 2019 की तुलना में पर्यटकों की संख्या में लगभग 75 फीसद की गिरावट देखने को मिला। केंद्र सरकार ने यह जानकारी संसद में दी थी। पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा था कि 2019 में विदेशी पर्यटकों की संख्या 1.93 लाख थी, 2018 में यह संख्या 1.56 करोड़ थी।


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