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न्यायालय के फैसले के बाद मणिकराव कोकाटे का इस्तीफा, अजीत पवार बोले- कानून सबसे ऊपर

Shantanu Roy
18 Dec 2025 6:39 PM IST
न्यायालय के फैसले के बाद मणिकराव कोकाटे का इस्तीफा, अजीत पवार बोले- कानून सबसे ऊपर
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Maharashtra. महाराष्ट्र। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महाराष्ट्र सरकार में खेल मंत्री रहे मणिकराव कोकाटे ने आखिरकार अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा माननीय न्यायालय के हालिया फैसले के बाद दिया गया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। अजीत पवार ने अपने ट्वीट में स्पष्ट किया कि मणिकराव कोकाटे ने न्यायालय के निर्णय के बाद उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जिसे उन्होंने पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप स्वीकार कर लिया है।


अजीत पवार ने ट्वीट में लिखा कि उनकी पार्टी का दीर्घकालिक और स्पष्ट सिद्धांत है कि “कानून का शासन सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।” इसी सिद्धांत के तहत उन्होंने सैद्धांतिक रूप से मणिकराव कोकाटे का इस्तीफा स्वीकार किया और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार उसे माननीय मुख्यमंत्री के पास विचार एवं स्वीकृति के लिए भेज दिया है। बताया जा रहा है कि न्यायालय के फैसले के बाद विपक्ष लगातार मणिकराव कोकाटे के इस्तीफे की मांग कर रहा था। ऐसे में इस्तीफे को राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। कोकाटे के इस्तीफे से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकार और सत्तारूढ़ दल न्यायिक आदेशों का सम्मान करते हैं और किसी भी विवादास्पद स्थिति में कानून के दायरे में रहकर निर्णय लेते हैं। मणिकराव कोकाटे महाराष्ट्र सरकार में खेल विभाग का जिम्मा संभाल रहे थे।


उनके कार्यकाल के दौरान खेल अधोसंरचना, खिलाड़ियों के प्रोत्साहन और विभिन्न खेल योजनाओं को लेकर कई फैसले लिए गए थे। हालांकि न्यायालय के फैसले के बाद उनके पद पर बने रहना राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस इस्तीफे का असर महाराष्ट्र की सत्ता समीकरणों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। विपक्ष इसे सरकार की मजबूरी बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों की जीत के रूप में पेश कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री इस्तीफे पर क्या अंतिम निर्णय लेते हैं और खेल मंत्री पद की जिम्मेदारी आगे किसे सौंपी जाती है। साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि मणिकराव कोकाटे भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया के तहत खुद को किस तरह निर्दोष या दोषमुक्त साबित करते हैं। कुल मिलाकर, मणिकराव कोकाटे का इस्तीफा महाराष्ट्र की राजनीति में कानून, नैतिकता और जवाबदेही के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।
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