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चंडीगढ़। पंजाब सरकार की ओर से ‘जगत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ को लेकर गठित सात सदस्यीय समन्वय समिति की पहली बैठक मंगलवार को पंजाब भवन, चंडीगढ़ में हुई। बैठक में अकाल तख्त साहिब की ओर से उठाई गई आपत्तियों, सुझावों और संशोधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति के सदस्य ज्ञानी रघबीर सिंह ने बैठक के बाद कहा कि हर बात को तुरंत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, क्योंकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसका परिणाम बताना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर जो भी आपत्तियां सामने आई हैं, उन पर समिति ने विस्तार से विचार-विमर्श किया है।
ज्ञानी रघबीर सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार ने सात सदस्यीय समिति का गठन विशेष रूप से ‘जगत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट’ और उस पर अकाल तख्त साहिब की आपत्तियों के संदर्भ में किया है। समिति का उद्देश्य संबंधित पक्षों के बीच संवाद स्थापित करना और ऐसा समाधान तलाशना है, जिस पर व्यापक सहमति बन सके। बैठक में समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे। इसके अलावा कानूनी विशेषज्ञों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और अन्य आमंत्रित विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। चर्चा की शुरुआत अरदास के साथ की गई और यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी फैसले में गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान और मर्यादा को सर्वोपरि रखा जाएगा।
सरकार द्वारा गठित समिति में पूर्व अकाल तख्त साहिब जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह सहित धार्मिक, न्यायिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़े सदस्य शामिल हैं। समिति को अकाल तख्त साहिब की ओर से प्राप्त सुझावों पर विचार करने और आगे के लिए समन्वय का रास्ता तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। अब इस मुद्दे पर आगे की बातचीत अकाल तख्त साहिब की समिति के साथ भी की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार अगली संयुक्त बैठक 12 या 13 अक्टूबर के आसपास प्रस्तावित की गई है। फिलहाल समिति ने साफ किया है कि अंतिम निष्कर्ष व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही सामने रखा जाएगा।
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