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कोर्ट ने सुनाई जेल की सजा
Betul बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की एक अदालत ने वन्यजीव शिकार के गंभीर मामले में चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन साल की कठोर कैद (रिगोरस इम्प्रिजनमेंट) की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला करीब आठ साल पुराना है, जिसमें जंगल में करंट लगाकर भालू का शिकार किया गया था। मामला फॉरेस्ट रेंज सारनी (जनरल) क्षेत्र का है। वन विभाग के अनुसार, 14 दिसंबर 2018 को हीरापुर बीट के कंपार्टमेंट क्षेत्र में सीमा रेखा के पास एक नाले में एक मृत भालू मिला था। जांच के दौरान पता चला कि भालू का दाहिना पंजा काट दिया गया था, जबकि दूसरे पंजे के नाखून भी गायब थे। शुरुआती जांच में यह मामला शिकार का सामने आया।
इसके बाद वन विभाग ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। जांच आगे बढ़ने पर वन अधिकारियों को आरोपियों के बारे में जानकारी मिली और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में प्रीतिश, रमेन उर्फ चंकी, राहुल और वासु शामिल थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जंगल में शिकार करने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने बताया था कि जंगली जानवर को मारने के उद्देश्य से जंगल के नाले में खूंटी लगाकर गैल्वेनाइज्ड लोहे का तार बिछाया गया था और उसमें बिजली का करंट प्रवाहित किया गया था। करंट लगने से भालू की मौत हो गई थी।
आरोपियों ने भालू के पंजे और नाखून निकालने की बात भी कबूल की थी। वन विभाग के अनुसार, इन अंगों का इस्तेमाल कथित रूप से जादू-टोने जैसी गतिविधियों में करने के लिए किया जाना था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील अजीत सिंह और अभयदीप सिंह ठाकुर ने अदालत में साक्ष्य पेश किए। सभी तथ्यों और गवाहों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुरेश यादव की अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी पाया।
अदालत ने प्रीतिश, रमेन उर्फ चंकी, राहुल और वासु को तीन-तीन साल की कठोर कैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, मामले में शामिल एक अन्य आरोपी कालू उर्फ सुभाष अभी फरार है। उसके खिलाफ अदालत ने कोई फैसला नहीं सुनाया है। वन विभाग ने फरार आरोपी की तलाश तेज कर दी है और उसे गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई पूरी करने की कोशिश की जा रही है।
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