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निजी मामलों
Bihar बिहार: चुनाव 2025 में महुआ विधानसभा सीट से उम्मीदवार तेज प्रताप यादव पर आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। महुआ थाना पुलिस ने उनके खिलाफ नामांकन के दौरान नीजी बोलेरो वाहन पर पुलिस स्टिकर और हूटर/सायरन का प्रयोग कर चुनावी प्रचार करने के आरोप में केस दर्ज किया। इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि वाहन पर पुलिस स्टिकर लगाकर तेज प्रताप का चुनावी प्रचार किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करना अपराध है और इसके तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। बिहार चुनाव के पहले चरण का नामांकन पूरा हो चुका है और इस तरह का मामला तेज प्रताप के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई जल्द की जाएगी।
तेज प्रताप यादव, जो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र हैं, को कुछ महीनों पहले उनके पिता द्वारा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी, जनशक्ति जनता दल, का गठन किया और अपनी पार्टी से 21 उम्मीदवारों की सूची जारी की। तेज प्रताप ने महुआ विधानसभा सीट से अपना नामांकन किया है और अपने चुनावी प्रचार में सक्रिय हैं। इससे पहले तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने महिला के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की थी। बाद में उन्होंने कहा कि उनका अकाउंट हैक कर लिया गया था और वह पोस्ट डिलीट कर दिया। इसके कुछ ही दिन बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव के बीच दूरी पैदा करने की साजिश रची जा रही है। परिवार में विवाद और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं।
लालू परिवार में राजनीतिक मुद्दों के अलावा निजी मामलों को लेकर भी चर्चा होती रही है। तेज प्रताप की बहन, रोहिणी आचार्य, कई मौकों पर परिवार में किसी बाहरी सदस्य के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त करती रही हैं। हालांकि, उन्होंने कई बार तेज प्रताप के फैसलों की भी तारीफ की। चुनाव में तेज प्रताप की पार्टी और उनके व्यक्तिगत प्रचार को लेकर सियासी हलचल तेज है। आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होने के कारण उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ है। पुलिस और चुनाव आयोग ने इस मामले पर गंभीरता दिखाई है और आरोप की पुष्टि के लिए जांच जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई करता है, जिससे उम्मीदवारों को चेतावनी दी जाती है कि नियमों का पालन अनिवार्य है। यदि आरोप साबित हुआ तो तेज प्रताप यादव के चुनाव प्रचार और उम्मीदवारिता पर प्रभाव पड़ सकता है। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा बढ़ गई है। विपक्षी दल और अन्य राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे चुनावी रणनीति और नियमों के उल्लंघन के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। वहीं तेज प्रताप और उनकी पार्टी के समर्थक इसे राजनीतिक निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं। बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण में महुआ विधानसभा सीट और तेज प्रताप यादव की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। इस मामले की जांच और चुनाव आयोग की कार्रवाई आगामी दिनों में तय करेगी कि तेज प्रताप पर लगे आरोपों का क्या परिणाम निकलता है।
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