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फाइटर जेट, पनडुब्बी, युद्धपोत, मिसाइल ने बढ़ाई भारत की सैन्य ताकत, देख दुश्मन की कांप उठती है रूह
jantaserishta.com
28 May 2023 10:51 AM IST

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आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है।
नई दिल्ली (आईएएनएस)| आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है। हमारी सेना के शौर्य और पराक्रम की चर्चा पूरी दुनिया में होती है। बीते कुछ महीनों या सालों में भारत की सैन्य ताकत तेजी से बढ़ी है। फ्रांस से खरीदे गए लड़ाकू विमान 'राफेल' की पूरी खेप भारत को मिल चुकी है। आईएनएस विक्रांत और मोरमुगाओ जैसे आधुनिक और स्वदेशी युद्धपोत भारतीय सेनाओं का हिस्सा हैं। वागीर पनडुब्बी और कई मिसाइलों ने भी भारत की सैन्य क्षमता में इजाफा किया है। बीते वर्ष दिसंबर में फाइटर जेट राफेल की अंतिम किस्त भारत पहुंची। इसी के साथ ही भारत फ्रांस के बीच हुआ राफेल सौदा पूरा हो गया। भारत और फ्रांस के बीच कुल 36 राफेल फाइटर जेट को लेकर सौदा हुआ था और अब भारत को सभी 36 राफेल मिल चुके हैं।
जानकारी के मुताबिक, राफेल लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा और उत्तरी सीमा की निगरानी के लिए है। जबकि एक दूसरा अन्य स्क्वाड्रन भारत की पूर्वी सीमा क्षेत्र की निगरानी के लिए है। रक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि राफेल डील पूरी होने से भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब चीन के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर तनाव और संघर्ष छिड़ा है।
एक अन्य बड़ी उपलब्धि के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय ने इसी वर्ष भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के लिए मॉड्यूलर पुलों के 41 सेट के स्वदेशी निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। यह पुल नहरों एवं खाइयों जैसी विभिन्न प्रकार की बाधाओं पर काबू पाने में सक्षम है।
इन बहुउपयोगी एवं परिवर्तनकारी पुलों को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा डिजाइन तथा विकसित किया गया है। मॉड्यूलर पुलों को लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) द्वारा डीआरडीओ-नामित उत्पादन एजेंसी के रूप में तैयार किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मॉड्यूलर ब्रिज की खरीद के लिए 8 फरवरी, 2023 को एलएंडटी के साथ 2,585 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मॉड्यूलर ब्रिज के प्रत्येक सेट में 8 गुणा 8 हैवी मोबिलिटी व्हीकल पर आधारित सात कैरियर व्हीकल और 10 गुणा 10 हेवी मोबिलिटी व्हीकल पर लगने वाले दो लॉन्चर व्हीकल शामिल होंगे।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 24 मार्च को लगभग 3,000 करोड़ रुपये के दो एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली 'प्रोजेक्ट हिमशक्ति' की खरीद के लिए बीईएल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह खरीद परियोजना स्वदेशी रूप से विकसित डिजाइन और निर्मित श्रेणी के तहत है, जिसमें समकालीन और उन्नत प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
भारतीय नौसेना ने बीते सप्ताह ही एक और मील का पत्थर हासिल किया है। नौसेना के आईएनएस विक्रांत पर पहले 'मिग-29के' फाइटर जेट ने नाइट लैंडिंग की है। नौसेना का कहना है कि यह रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय नौसेना के मुताबिक, भारत के स्वदेशी आईएनएस विक्रांत युद्धपोत पर 'मिग-29के' को रात में सफलतापूर्वक लैंडिंग कराई गई है। नौसेना की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत की ओर बड़ा कदम है।
गौरतलब है कि इससे पहले तेजस विमान के नौसैनिक वर्जन ने आईएनएस विक्रांत पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी। इससे पहले भारतीय नौसेना ने कामोव 31 हेलीकॉप्टर को भी 28 मार्च को आईएनएस विक्रांत पर उतारा गया था।
भारतीय नौसेना के डिस्ट्रॉयर युद्धपोत आईएनएस 'मोरमुगाओ' ने भी भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा किया है। इसी महीने मोरमुगाओ से एक एडवांस मिसाइल की बेहद महत्वपूर्ण व सफल टेस्टिंग की गई है। 'सी स्कीमिंग' के नाम से विख्यात इस मिसाइल की टेस्टिंग के दौरान मिसाइल ने समुद्र में तैरते हुए टारगेट को नीचे से हिट किया। भारतीय नौसेना के मुताबिक टेस्टिंग के दौरान मिसाइल का निशाना बिल्कुल सटीक था और वह अपने लक्ष्य को भेदने में सफल रही। नौसेना का कहना है कि यह मिसाइल 300 किलोमीटर की दूरी तक अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
इसी वर्ष मार्च में भारतीय नौसेना ने ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल स्वदेशी बूस्टर से लैस है। नौसेना ने अरब सागर में अपने समुद्री जहाज से इस मिसाइल का परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस ब्रह्मोस मिसाइल के बूस्टर को डीआरडीओ ने डिजाइन किया है। नौ सेना द्वारा किए गए परीक्षण के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल ने अरब सागर में सटीक हमला करते हुए अपने टारगेट को भेदा है।
भारतीय नौसेना कलवारी श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी वागीर के परिचालन की शुरूआत (कमीशन) करने जा रही है। यह पनडुब्बी सतह-रोधी युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, खुफिया जानकारी एकत्र करने, माइन बिछाने और विभिन्न निगरानी मिशनों में सक्षम है। नौसेना के बेड़े में शामिल होने पर यह पनडुब्बी भारतीय नौसेना की शक्ति और अधिक बढ़ाएगी। नौसेना के 23 जनवरी को इसे नौसेना में कमीशन किया है।
हालांकि इन कामयाबियों के बीच भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने अपने मिग-21 लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि मिग-21 फाइटर जेट बीते 5 दशकों से भारतीय वायु सेना के बेड़े का महत्वपूर्ण विमान है। वायु सेना के मुताबिक यह रोक मिग-21 लड़ाकू विमानों के पूरे बेड़े पर लगाई गई है। बीते दिनों राजस्थान में हुई मिग-21 लड़ाकू विमान कि दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अब वायु सेना ने यह निर्णय लिया है।
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