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बैल पर सवार होकर तहसील पहुंचा किसान, कर्जमाफी की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन

Shantanu Roy
24 Jun 2026 1:33 PM IST
बैल पर सवार होकर तहसील पहुंचा किसान, कर्जमाफी की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन
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Chandrapur. चंद्रपुर। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक किसान ने कर्जमाफी की मांग को लेकर ऐसा अनोखा प्रदर्शन किया, जिसने प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। राजुरा तहसील के गोयेगाव निवासी किसान दिवाकर हिरामन पहनपाटे बैल पर सवार होकर सीधे तहसीलदार कार्यालय पहुंच गए और वहां जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार से कर्जमाफी की मांग की। किसान के इस अनूठे आंदोलन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा हो रही है।

आमतौर पर किसान अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन, रैली, मोर्चा या ज्ञापन का सहारा लेते हैं, लेकिन दिवाकर पहनपाटे ने अपनी पीड़ा को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया। उन्होंने खेती और ग्रामीण जीवन के सबसे बड़े प्रतीक बैल को अपने आंदोलन का माध्यम बनाया। बैल पर बैठकर तहसील कार्यालय पहुंचना केवल एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह किसानों की मौजूदा आर्थिक स्थिति और कृषि संकट का प्रतीकात्मक संदेश भी था।जानकारी के अनुसार, किसान दिवाकर हिरामन पहनपाटे लंबे समय से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होने, उत्पादन लागत बढ़ने और कर्ज के दबाव ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में उन्होंने प्रशासन और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए यह अनूठा रास्ता चुना।

तहसील कार्यालय पहुंचने के बाद किसान ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और "कर्जमाफी होनी ही चाहिए" के नारे लगाए। कुछ समय के लिए तहसील परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई और हर कोई इस अनोखे प्रदर्शन को देखने लगा। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इसका वीडियो बनाया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बैल भारतीय कृषि व्यवस्था का आधार माना जाता है। ऐसे में किसान का बैल पर सवार होकर कार्यालय पहुंचना इस बात का प्रतीक है कि आज भी खेती-किसानी कठिन दौर से गुजर रही है। यह प्रदर्शन किसानों की उस पीड़ा को दर्शाता है, जो बढ़ते कर्ज, महंगे कृषि संसाधनों और अनिश्चित मौसम के कारण लगातार बढ़ती जा रही है।

किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य के कई किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और कर्जमाफी का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। यदि समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गया तो किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। इस वर्ष मानसून की अनिश्चितता ने भी किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। कई क्षेत्रों में बारिश समय पर नहीं पहुंची है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। दूसरी ओर, किसानों पर पहले से ही बैंक और निजी कर्ज का बोझ है। ऐसे में खेती की लागत और बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल कर्जमाफी तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही कृषि उत्पादों के उचित मूल्य, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल बीमा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और कृषि लागत को कम करने जैसे उपायों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। दिवाकर पहनपाटे का यह आंदोलन भले ही प्रतीकात्मक रहा हो, लेकिन इसने किसानों की वास्तविक समस्याओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग किसान की रचनात्मक पहल की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे किसानों की मजबूरी और बेबसी का प्रतिबिंब बता रहे हैं। फिलहाल किसान के इस अनोखे प्रदर्शन ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। लेकिन इतना तय है कि बैल पर सवार होकर तहसील पहुंचे इस किसान ने अपनी आवाज को पूरे प्रदेश तक पहुंचाने में सफलता जरूर हासिल कर ली है।
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