19 साल के बेटे का पुलिस ने किया फर्जी एनकाउंटर, परिजन का आरोप

पंजाब। गुरदासपुर जिले में 19 वर्षीय रणजीत सिंह की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. परिवार ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है, जबकि पुलिस अपने ऑपरेशन को सही ठहरा रही है. जानकारी के मुताबिक रणजीत सिंह, जो अपने परिवार का इकलौता बेटा था, उन्हें कथित तौर पर शाम करीब 4 बजे उसके घर से उठाया गया. बाद में पुलिस ने उसे गुरदासपुर के दोरंगला सेक्टर स्थित अधियान चेक पोस्ट पर दो पंजाब पुलिसकर्मियों की हत्या से जुड़े मामले में मुठभेड़ में मारा गया बताया.
रणजीत की मां सुखविंदर कौर समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने सामने आकर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि रणजीत को झूठा फंसाया गया, अवैध तरीके से घर से उठाया गया और बाद में एनकाउंटर दिखाकर मार दिया गया. परिवार ने पूरे मामले में सबूत पेश करने, न्याय दिलाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. रणजीत के चाचा ने आरोप लगाया कि मुठभेड़ से एक दिन पहले गांव के सीसीटीवी कैमरे हटा दिए गए थे और ग्रामीणों को उस इलाके में न जाने की हिदायत दी गई थी जहां एनकाउंटर हुआ. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'अगर कोई संलिप्तता थी भी, तो क्या पुलिस सीधे गोली मार देगी? हमें सबूत चाहिए.' इस मामले में शिरोमणि अकाली दल ने भी बिना ट्रायल किसी को दोषी ठहराने पर गंभीर सवाल उठाए हैं और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच की मांग की है.
वहीं पुलिस का कहना है कि दो पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया था और एक आरोपी मुठभेड़ में मारा गया. पुलिस ने यह भी दावा किया है कि पुलिसकर्मियों की हत्या आईएसआई के इशारे पर 20 हजार रुपये में कराई गई थी, जिसमें 3 हजार रुपये एडवांस दिए गए थे. हालांकि उसी रात बाइक पर पांच लोगों की आवाजाही से जुड़े सीसीटीवी सवालों पर पुलिस ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया है.





