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भंडाफोड़
Delhi दिल्ली: नई दिल्ली जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने इंश्योरेंस ब्रोकरेज ऑफिस की आड़ में चल रहे मुंबई स्थित साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इसी के साथ पुलिस ने इस मामले से संबंधित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दरअसल, नई दिल्ली जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यूअल के बहाने एक सीनियर सिटिजन के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। यह मामला नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के जरिए मिली शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें एक प्रतिष्ठित हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के एग्जीक्यूटिव बनकर एक व्यक्ति का व्हाट्सअप कॉल आया। पॉलिसी रिन्यूअल की औपचारिकताओं के बहाने, कॉलर ने पीड़ित को संवेदनशील क्रेडिट कार्ड की जानकारी देने के लिए राजी कर लिया। इसके बाद पीड़ित की सहमति के बिना उसके क्रेडिट कार्ड से 1,60,596 रुपए के तीन अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कुल राशि 4,81,788 थी। इसके अनुसार, नई दिल्ली जिला साइबर पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धाराओं के तहत 17 अप्रैल को मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
पुलिस जांच से पता चला कि धोखाधड़ी से हासिल फंड का इस्तेमाल सोने की ईंटें खरीदने में किया गया, जिसमें 10 ग्राम की दो और 5 ग्राम की दो सोने की ईंटें शामिल थीं। वहीं, टेक्निकल एनालिसिस से पता चला कि मुंबई, महाराष्ट्र से काम करने वाला एक ग्रुप इसमें शामिल था। इसी को लेकर नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन की एक खास टीम, जिसमें एसआई अनुराग, हेड कांस्टेबल मनोज, हेड कांस्टेबल द्रोणा और हेड कांस्टेबल विजय शामिल थे, ने मुंबई में बड़े पैमाने पर टेक्निकल सर्विलांस और फील्ड वेरिफिकेशन किया। भरोसेमंद टेक्निकल जानकारी के आधार पर, मुंबई के मलाड वेस्ट में चल रहे एक ऑफिस पर छापा मारा गया, जिसे एक असली थर्ड-पार्टी हेल्थ इंश्योरेंस ब्रोकरेज फर्म के तौर पर दिखाया जा रहा था।
छापे के दौरान पता चला कि इस जगह का इस्तेमाल देश भर के इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर्स को टारगेट करके धोखाधड़ी वाली टेली-कॉलिंग एक्टिविटीज के लिए किया जा रहा था। इस दौरान कई टेलीकॉलर्स अनजान लोगों को इंश्योरेंस से जुड़ी धोखे वाली कॉल करते हुए पाए गए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साहिल अहमद शेख (उम्र-23 वर्ष), उमेर अली सैयद (उम्र-23 वर्ष) और वरुण गुप्ता (उम्र-22 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी पहले दूसरी इंश्योरेंस ब्रोकरेज कंपनियों में टेलीकॉलर के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, 13 साथियों को बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत पाबंद किया गया।
जांच में पता चला कि आरोपियों ने इंश्योरेंस ब्रोकरेज ऑफिस की आड़ में एक अच्छी तरह से ऑर्गनाइज्ड साइबर फ्रॉड मॉड्यूल बनाया था। वे संभावित पीड़ितों की पहचान करने के लिए कस्टमर डेटाबेस का इस्तेमाल करते थे और उनसे इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यूअल, कैंसिलेशन या रिफंड प्रोसेसिंग के बहाने संपर्क किया जाता था। पीड़ितों का भरोसा जीतने के बाद, आरोपी उन्हें क्रेडिट कार्ड डिटेल्स और ओटीपी जैसी गोपनीय बैंकिंग जानकारी बताने के लिए मना लेते थे। चुराई गई कार्ड डिटेल्स का इस्तेमाल तुरंत सोने की ईंटों की महंगी ऑनलाइन खरीदारी के लिए किया जाता था, जिन्हें बाद में अपराध से मिली रकम को ठिकाने लगाने के लिए कैश में बदल दिया जाता था।
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